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मंगलवार, 7 नवंबर 2017

आँगन में खेल रहे बच्चे ,-----बाल कविता ---







आँगन  में खेल रहे  बच्चे  ,
भोले भाले मन के सच्चे !

एक दूजे के कानों में -
गुप चुप  से बतियाते हैं   ,
  तनिक जो हो  अनबन आपस में -
खुद मनके गले मिल  जाते है  ;
भले  -बुरे  तर्क ना जाने
बस हैं  थोड़े अक्ल के कच्चे !
आँगन  में खेल रहे बच्चे  !!

निश्छल  राहों के ये राही -
भोली  मुस्कान से जिया   चुरालें ,
नजर भर देख ले जो इनको
बस हंसके गले लगा ले ;
 अभिनय नहीं  इनकी फितरत
जो मन में वो ही मुखड़े पे दिखे !
आंगन  में  खेल रहे  बच्चे !!

इन नन्हे  फूलों  से  आज -
ये आँगन  का उपवन  महक रहा है ,
 सूना  और वीरान था पहले -
अब कोना - कोना  चहक रहा है ,
कौतुहल से भरे ये चुन- मुन--
मन के कोमल-  शक्ल के  अच्छे !
आँगन में खेल  रहे  बच्चे !!
भोले भाले मन के सच्चे !!!!!!!!!!!!




!

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर बचपन की याद दिलाती मनमोहक रचना। बच्चे ही जीवन के संवाहकहैहैं हम तो सि्फ एक वाहक हैं।

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  2. नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 09-11-2017 को प्रातः 4:00 बजे प्रकाशनार्थ 846 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर। सधन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सूचना (संशोधन) -

      नमस्ते, आपकी रचना के "पाँच लिंकों का आनन्द" ( http://halchalwith5links.blogspot.in) में प्रकाशन की सूचना
      9 -11 -2017 ( अंक 846 ) दी गयी थी।
      खेद है कि रचना अब रविवार 12-11 -2017 को 849 वें अंक में प्रातः 4 बजे प्रकाशित होगी। चर्चा के लिए आप सादर आमंत्रित हैं।




      हटाएं
  3. अभिनय नहीं इनकी फितरत
    जो मन में वो ही मुखड़े पे दिखे !
    आंगन में खेल रहे बच्चे !!

    बहुत सच्ची रचना। बहुत अच्छी रचना। बच्चों की सच्चाई जैसी। बच्चों की अच्छाई जैसी। अप्रतिम आदरणीया

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई और शुभकामनायें।

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  5. सुन्दर, बहुत सुन्दर....
    सही कहा बच्चे भोले भाले मन के सच्चे
    वाह!!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह! बहुत ही सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं

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