समस्त मातृ सत्ता को नमन करते हुए सबको मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 🙏
*तेरी एक पुकार पे पीहर*
तेरी एक पुकार पे पीहर
चली आती हूँ दौड़ी माँ!
बैठ सुख -दुःख साझा करती
फिर माँ बेटी की जोड़ी माँ!
बैकुंठ धाम- सा घर तेरा!
देख तृप्त हो जाऊँ माँ,
हर पीड़ा और चिंता से,
पल में मुक्त हो जाऊँ माँ!
स्नेह- ममता की नींव है जिसकी
तेरे त्याग की ईंट और रोड़ी माँ!
हँसी खुशी के रंग बिखरे
तेरा आँगन अजब अनूठा माँ!
तरुवर विशाल बन झूम रहा
संस्कार तेरे का बूटा माँ
इसके आगे फीकी जग की
ये माया लाख करोड़ी माँ!
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माँ बेटी
जब माँ- बेटी ने मिल कर
कुछ रातें संग बिताई होंगी
जी भर गुरबत कर बेटी से
माँ खुल कर मुस्काई होगी।
भला- बुरा जिसने जो किया,
बस अपने ऊपर भार लिया!
याद ना रखती माँ कुछ भी
सबका हर दोष बिसार दिया!
गुनते लेखा-जोखा जीवन का
माँ की आँख भर आई होगी
नाती -पोतों से भरा है आँगन
माँ की शान गजब की है!
दामन में भर दुआएँ बैठी
माँ धनवान गज़ब की है!
सुख देख रही साँझे कुल का
कहाँ ऐसी नेक कमाई होगी!
काया हो जर्जर रह गई आधी"
होता देख जिया को कम्पन!
छुआ जो बेटी ने माँ को,
डराती होगी देह की ठंडक!
स्नेह से स्पर्श किया बेटी ने,
कमजोर देह गरमाई होगी!
जी -भर गुरबत कर बेटी से
माँ खुल कर मुस्काई होगी।
🙏🙏🌹🌹
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आपको पुनः सृजन करते देखकर अत्यन्त हर्ष हुआ रेणु जी। अच्छी कविताएं रची हैं आपने।
जवाब देंहटाएंजितेंद्र जी, जितनी खुशी आपको हुई उतनी मुझे आपको यहाँ देखकर हुई! सस्नेह अभिनन्दन 🙏
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 10 मई 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
पांच लिंक से एक बार फिर जुड़ना अच्छा लग रहा है ! आभार पांच लिंक आभार रविन्द्र जी 🙏
हटाएंउम्दा भावाभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंबधाई
हार्दिक अभिनन्दन है दीदी 🙏
जवाब देंहटाएंआपकी यह कविता हृदय को छू लेने वाली है। यह न केवल माँ की महिमा गाती है, बल्कि एक बेटी के अपने अस्तित्व की जड़ों (roots) की ओर लौटने की छटपटाहट और खुशी को भी बखूबी दर्शाती है।
जवाब देंहटाएंजी कविता जी,बेटी की आत्मा माँ के लिए सदा व्याकुल रहती है! बेटियों का नसीब उन्हें माँ से दूर तो ले जाता है पर मन सदा पास रहता है! भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आभार आपका 🙏
हटाएंIn response to a comment by कविता रावत
वाह!सखी रेनु जी ,बहुत ही बेहतरीन सृजन । माँ जैसा जग में कोई नहीं 🌷
जवाब देंहटाएंआभार शुभा जी 🙏
हटाएंबहुत भावपूर्ण रचनायें
जवाब देंहटाएंआभार अनीता जी 🙏
हटाएंबहुत भावपूर्ण सुंदर रचना …
जवाब देंहटाएंमाँ को समर्पित भाव मन में सीधे उतर जाते हैं
हार्दिक आभार दिगम्बर जी 🙏
हटाएंबेहतरीन रचनाएं। कुछ ही पंक्तियों में अनेक भाव छिपे हैं। कुछ महीने पहले माँ चली गईं। तबसे इस विषय से बच रहा हूँ, जैसे मन मानने को ही तैयार नहीं....
जवाब देंहटाएंप्रिय मोहित, बहुत ह्रदयविदारक है जीवन से माँ का जाना! बहुत दुःख हुआ जानकर! ये क्षति दुनियावी नहीं रूहानी है जिसके लिए कोई सांत्वना नहीं हो सकती 🙏😟
हटाएंबेहतरीन रचना, बहुत समय बाद आपकी पोस्ट देखी और पढ़ी, बहुत अच्छा लगा 🙏
जवाब देंहटाएंप्रिय हरीश जी आभारी हूँ आप रचना तक आये 🙏
हटाएंबेहतरीन भावपूर्ण
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