मेरी प्रिय मित्र मंडली

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

मैं सैनिक

  

🙏🙏🌷🌷🙏🙏सेना दिवस के शुभ अवसर पर देश के वीर बांकुरों को शत- शत नमन, जो रण में वीर हैं तो विपदकाल में धीर हैं 🙏🙏🌷🌷🙏🙏

निर्भय हूँ  और राष्ट्र को
आश्वासन देता  निर्भय  का ,
मृत्यु -पथ का राही मैं
चिर अभिलाषी  अमर विजय का!

मिटा दूँ शत्रु नराधम  को  
जो छुप के घात लगाता ,
पल में डालूँ  चीर  
जब आँख से आँख मिलाता ,
 टकराऊँ  तूफानों से
मैं झोंका  प्रचंड प्रलय का !

माटी  मांगे  खून 
झट से कर्तव्य निभाता,
मातृभूमि  की बलिवेदी पर ,
हँस अपना शीश चढ़ाता,
 नश्वर  जीवन से मोह कैसा ?
नियत पल अनंत विलय का !

मंजुल भाव   लिए भीतर
फौलादी ये तन मेरा  ,
भूला अपनों को  इस  धुन में
 देशहित सर्वस्व समर्पण मेरा ,
वरण  कर चला  सतपथ का
ना सर झुके हिमालय का 
मृत्यु -पथ का राही मैं
चिर अभिलाषी  अमर विजय का!

 

 

 

 


मंगलवार, 11 जनवरी 2022

सब गीत तुम्हारे हैं


 




तुम्हारी यादों की  मृदुल
 छाँव में  बैठ सँवारे  हैं 
मेरे पास कहाँ कुछ था
 सब गीत तुम्हारे हैं |


मनअम्बर पर टंका हुआ है,
ढाई  आखर  प्रेम  तुम्हारा।
थके  प्राणों का  संबल  जो,
पग - पग  पे  करता उजियारा।
हुए निहाल  निहार तुम्हें,
बिसरे दुःख सारे हैं!

सराबोर हैं आत्मरस से ,
ये जो छंद अनोखे हैं ।
तुमसे ही जीवनसार मिला,
शेष दावे सब थोथे है!
वही पल बस लगते अपने,
जो साथ गुजारे हैं!


तुम आए बदल गयी  दुनिया  
खुली पोटली सपनों की ,
सतरंगी आभा से सजे
बदली है भाषा नयनों की!
नये गगन में मनपाखी ने
 पंख पसारे हैं !

प्रीतनगर की इन गलियों से, 
अब तक तो अनजान थे हम।
अब कहीं जाकर मिला बसेरा,
कब किस दिल के मेहमान थे हम।
सालों मनचले सपनों ने ,  
ये  पथ खूब निहारे हैं!


तुम्हारी यादों की  मृदुल
 छाँव में  बैठ सँवारे  हैं 
मेरे पास कहाँ कुछ था
 सब गीत तुम्हारे हैं |

विशेष रचना

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा ----- कविता ---

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा   भला ! कैसे पहुँच पाऊँगी मैं ?  पर ''इक रोज मिलूंगी तुमसे  '' कह जी को बहलाऊंगी मैं ! मौन...