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शनिवार, 26 अक्तूबर 2019

दीपमाल के उत्सव में- कविता


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दीपमाल  के उत्सव में
अनायास तुम  याद  आये , 
 जा  तुममें ही उलझा  चितवन 
 हर दीप में  तुम्हीं नजर आये ! !

 जीवन अभिनय से  कोसों दूर
तुम स्नेही सखा मेरे मन के ,  
 ओझल  नजरों से दुनिया की 
 पावन- सिन्धु अपनेपन के . 
पल  सुखद  तुम्हारी यादों के
 विचलित  मेरा मन  सहलाएं !
 रहा   तुममें ही उलझा चितवन 
 हर दीप में  तुम्हीं   नजर आये !!


अवनि -अम्बर को जोड़ रही -
 उजालों की  अनगिन लड़ियाँ
 पर  मन को  लगी बींधने  क्यों
कण -कण में बिखरती फुलझड़ियाँ . 
सघन  नैन कुहासों में  बरबस ,
 बन चन्द्र-नवल  तुम मुस्काए !
 जा   तुममें ही    उलझा चितवन 
 हर दीप में  तुम्हीं   नजर आये  

मौन स्वर ये  प्रार्थना  के 
तुम्हें समर्पित अविराम मेरे .
 उपहार तुम्हारा अनमोल वो पल  
 जो लिख दिए तुमने नाम मेरे ;
 प्रेम -प्रदीप्त दो नयन तुम्हारे
जब  भी सुधियों में छाये !
 जा  तुममें ही   उलझा चितवन 
 हर दीप में  तुम्हीं   नजर आये  !!

स्वरचित 
चित्र गूगल से साभार 
सभी साहित्य- प्रेमियों को दीपावली की  मंगलकामनाएं और बधाई |

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