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शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

आज कहीं मत जाना

दिन  आज का बहुत सुहाना साथी -
आज कहीं मत जाना  साथी !!

  मुदित मन के मनुहार खुले हैं ,
 नवसौरभ के बाजार खुले हैं ;
 डाल - डाल पर नर्तन करती -
कलियों के बंद द्वार खुले हैं ;
 सजा   हर वीराना साथी
आज कहीं मत जाना साथी

ये तप्त दुपहरी  जीवन की -
 थी मंद पड़ी प्राणों की उष्मा ,
 जाग पड़ी तुम्हारी  आहट से
सोयी  अंतस की  चिरतृष्णा
हुआ विरह का राग पुराना साथी -
आज कहीं मत जाना साथी -

सुन स्वर तुम्हारा सुपरिचित -
 ले हिलोरें पुलकित अंतर्मन , 
जाने  जोड़ा किसने  और कब?
प्रगाढ़ हुआ  ये मन का बंधन ; 
मिला नेह  नज़राना  साथी  ,
आज   कहीं मत जाना साथी !!

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