मेरी प्रिय मित्र मंडली

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

आज कहीं मत जाना -गीत

दिन  आज का बहुत सुहाना साथी  !
आज कहीं मत जाना  साथी !!

  मुदित मन के मनुहार खुले हैं ,
 नवसौरभ के बाजार खुले हैं ;
 डाल - डाल पर नर्तन करती  
कलियों के बंद द्वार खुले हैं ;
 सजा   हर वीराना साथी !
आज कहीं मत जाना साथी!!

ये तप्त दुपहरी  जीवन की 
 थी मंद पड़ी प्राणों की उष्मा ,
 जाग पड़ी तुम्हारी  आहट से
सोयी  अंतस की  चिरतृष्णा,
हुआ विरह का राग पुराना साथी  !
आज कहीं मत जाना साथी !!

सुन स्वर तुम्हारा सुपरिचित  
 ले हिलोरें पुलकित अंतर्मन , 
जाने  जोड़ा किसने  और कब?
प्रगाढ़ हुआ  ये मन का बंधन ; 
मिला नेह  नज़राना  साथी  !
आज   कहीं मत जाना साथी !!

विशेष रचना

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