मेरी प्रिय मित्र मंडली

गुरुवार, 9 जुलाई 2026

ओ चाँद!

 

🙏मेरे ब्लॉग क्षितिज की आठवीं वर्षगाँठ पर मेरे सभी स्नेही पाठकों का हार्दिक अभिनन्दन 🙏



ओ चाँद !क्या वापस ला सकोगे

वो सुहानी -सी चाँद रात मेरी,

तुम्हारे सामने हो रही थी

जब सखा से बात मेरी!


बने साक्षी तुम्हीं सदा

उस मौन अभिनव प्रेम के

देते रहे संदेश अनवरत

प्रिय के कुशल क्षेम के!

जिसकी महक से महकती

हर नवल प्रभात मेरी!

ओ चाँद !क्या वापस ला सकोगे

वो सुहानी सी चाँद रात मेरी!


थी दूधिया स्वच्छ चाँदनी

खिला था मन का कमल!

विहंसते नयन में झाँकती,

एक छवि अभिराम निर्मल

फिसली मुट्ठी से रेत -सी,

मीठे प्यार की सौगात मेरी!

ओ चाँद! क्या वापस ला सकोगे

वो सुहानी सी चाँद रात मेरी!


अतीत की डगर- डगर

जा ढूँढती चारों पहर,

सम्बल थे जो जीने का

गुम हुए पल जाने किधर!

प्यार की रंगत थी जिसमें

खो गई हसीं कायनात मेरी!

ओ चाँद! क्या वापस ला सकोगे

वो सुहानी सी चाँद रात मेरी!





🙏ब्लॉग पर पहली पोस्ट 🙏

https://renuskshitij.blogspot.com/2017/07/blog-post.html?m=1


शुक्रवार, 8 मई 2026

माँ के लिए दो कविताएँ

 

समस्त मातृ सत्ता को नमन करते हुए सबको मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 🙏

*तेरी एक पुकार पे पीहर*

तेरी एक पुकार पे पीहर

चली आती हूँ दौड़ी माँ! 

बैठ सुख -दुःख साझा करती

फिर माँ बेटी की जोड़ी माँ! 


बैकुंठ धाम- सा घर तेरा! 

देख तृप्त हो जाऊँ माँ, 

हर पीड़ा और चिंता से, 

पल में मुक्त हो जाऊँ माँ! 

स्नेह- ममता की नींव है जिसकी

तेरे त्याग की ईंट और रोड़ी माँ! 


हँसी खुशी के रंग बिखरे

तेरा आँगन अजब अनूठा माँ! 

तरुवर विशाल बन झूम रहा

संस्कार तेरे का बूटा माँ

इसके आगे फीकी जग की

ये माया लाख करोड़ी माँ! 

   ***************          

      माँ बेटी 


जब माँ- बेटी ने मिल कर
कुछ रातें संग बिताई होंगी
जी भर गुरबत कर बेटी से
माँ खुल कर मुस्काई होगी।

भला- बुरा जिसने जो किया,
बस अपने ऊपर भार लिया!
याद ना रखती माँ कुछ भी
सबका हर दोष बिसार दिया!
गुनते लेखा-जोखा जीवन का
माँ की आँख भर आई होगी

नाती -पोतों से  भरा है आँगन
माँ की शान गजब की है!
दामन में भर दुआएँ बैठी
माँ धनवान गज़ब की है!
सुख देख रही साँझे कुल का
कहाँ ऐसी नेक कमाई होगी!

काया हो जर्जर रह गई आधी"
होता देख जिया को कम्पन!
छुआ  जो  बेटी  ने माँ को,
डराती होगी देह की ठंडक!
स्नेह से स्पर्श किया बेटी ने, 
कमजोर देह गरमाई होगी!
जी -भर गुरबत कर बेटी से
माँ खु
ल कर मुस्काई होगी।

🙏🙏🌹🌹

†************************


विशेष रचना

मन पाखी की उड़ान -- प्रेम गीत ( prem geet)

              मन पाखी की उड़ान  तुम्हीं तक मन मीता  जी का सम्बल तुम एक  भरते प्रेम घट रीता  ! नित निहारें नैन चकोर  ना   नज़र में कोई दूजा  हो...