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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

तुम मिले कोहिनूर से -- कविता


विशेष रचना

क्षमा करना हे श्रमवीर!

औरंगबाद के दिवंगत   श्रमवीरों के नाम --        ऐसे सोये- सोते ही रहे- -- , भला! ऐसी भी क्या आँख लगी ? पहचान सके ना मौत कीआहट-   अ...