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सोमवार, 9 मार्च 2020

देखो मतवाला दिन आया

देखो मतवाला दिन आया
 बिखरे होली के रंग गलियों में
टेसू  फूले ,गुलाब महके
उडी भीनी पुष्प गंध गलियों में

 श्वेत -श्याम एक हुए 
 ना  ऊंच- नीच का भेद रहा 
 रंग एक रंगे  सभी  देखो 
 एक दूजे के  संग -संग गलियों में 
टेसू  फूले ,गुलाब महके . 
उडी भीनी पुष्पगंध गलियों में !!

  ढोल बजे हुडदंग मचे
फूला मन उड़ा  पतंग   जैसे 
गोरी गुलाल से लाल हुई 
फैले   मधुर आनन्द  गलियों में 
  टेसु  फूले, गुलाब  महके 
उडी  भीनी पुष्प  गलियों  में  ! 

घोंट ठंडाई   खूब  चढाये 
 ना कोई बस   में  कर आये
बड़े लाला  घूम  रहे हैं  
 मस्ती में  पी भंग गलियों में 
 टेसू  फूले ,गुलाब महके . 
उडी भीनी पुष्पगंध गलियों में !!

उत्सव जगा ठहरे  जीवन में 
मस्ती के मेले  खूब सजे , 
महकी हवायें गुझिया  से  
 छाई अजब  उमंग गलियों  में 
टेसू  फूले ,गुलाब महके . 
उडी भीनी पुष्पगंध गलियों में !!





गुरुवार, 5 मार्च 2020

तुम्हें बदलते देख रही हूँ

मौसम बदलते देखे थे
अब तुम्हें  बदलते देख रही हूँ
सूरज से आये थे एक दिन
साँझ सा  ढलते   देख रही हूँ !


  जिन आँखो  से पोंछ के आसूं
 मुस्कानें   भर दी थी तुमने, 
 आज उन्हीं में  फिर से   -
 सावन  उमड़ते   देख रही हूँ !

  दहल जाता है ये मन अक्सर 
 तुम्हें खो जाने के डर से,
कहीं  वीरानों  में  ना खो जाऊं
 खुद को संभलते   देख रही हूँ !

क्या वो तुम ही थे 
जिसके लिए  जान बिछाई थी? 
हवा हुए अनुबंध प्रेम के, 
घावों को रिसते  देख रही हूँ !

 मेरी पहुँच से दूर हो फिर  भी,.
अनजानी -सी ये  जिद  कैसी ?
चाँद खिलौने पर देखो - 
मनशिशु   मचलते   देख रही हूँ !!

 

विशेष रचना

क्षमा करना हे श्रमवीर!

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