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शनिवार, 29 सितंबर 2018

नेह - तूलिका -कविता




सुनो !   सखा- ले   नेह - तूलिका -
 रंग दो मन की कोरी चादर
 हरे ,गुलाबी ,  लाल , सुनहरी 
 रंग इठलायें  जिस पर  खिलकर !!

 सजे  सपने इन्द्रधनुष के   -
 नीड- नयन     से मैं   निहारूं 
सतरंगी आभा पर इसकी -
तन -मन मैं  अपना     वारूँ
बहें  नैन -जल कोष  सहेजे--
 मुस्काऊँ  नेह -अनंत पलक  भर !!
  
स्नेहिल सन्देश   तुम्हारे -
 नित शब्दों में  तुमसे मिल लूं   -
 यादों के गलियारे  भटकूँ -
फिर से  बीते हर  पल  जी लूं  ;
डूबूं आकंठ उन  घड़ियों में -
 दुनिया की हर सुध  बिसराकर

   अनंत मधु मिठास रचो तुम
आहत मन की आस रचो तुम
रचो प्रीत उत्सव कान्हा बन -
 जीवन  का मधुमास रचो तुम 
  खिलो कंवल  बन   मानसरोवर  
 सजो  अधर   चिर हास तुम  बनकर !!!!!!!!!
चित्र -- पञ्च लिंकों से साभार --  
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धन्यवाद  शब्दनगरी ------- 

रेणु जी बधाई हो!,

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