मेरी प्रिय मित्र मंडली

शनिवार, 28 अप्रैल 2018

मैं श्रमिक --- कविता --

मैं श्रमिक  ---  कविता  --
इंसान हूँ मेहनतकश मैं  
नहीं लाचार या बेबस मैं !

किस्मत हाथ की रेखा मेरी  

रखता मुट्ठी में कस मैं !!

बड़े गर्व से खींचता
  जीवन का ठेला ,
संतोषी मन देख रहा
अजब दुनिया का खेला !!

गाँधी सा सरल चिंतन -
मैले कपडे उजला मन ,
श्रम ही स्वाभिमान मेरा -
हर लेता पैरों का कम्पन !

भीतर मेरे गांव बसा
है कर्मभूमि नगर मेरी ,
हौंसले कम नहीं  हैं   
कठिन भले ही डगर मेरी !!!!!!!!!

चित्र --- गूगल से साभार ------
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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

बुद्ध की यशोधरा -- कविता |

बुद्ध की योधशरा की पेंटिंग के लिए छवि परिणाम

बुद्ध की प्रथम और अंतिम नारी 
 उसके मन में  जिसने झाँका,
जैसे जागी  थी , तू कपलायिनी ! 
ऐसे  कोई नहीं जागा !!

पति- प्रिया से बनी  पति -त्राज्या 
सहा अकल्पनीय दुःख पगली,
नभ से आ  गिरी  धरा पे 
नियति तेरी ऐसी बदली ;

वैभव  से बुद्ध ने किया पलायन
तुमने वैभव में सुख त्यागा !
सिद्धार्थ  बन गये बुद्ध भले   
ना  तोडा  तुमने  प्रीत का धागा !!
 
बुद्ध को सम्पूर्ण करने वाली 
 एक नारी बस तुम थी ,
 थे  श्रेष्ठ बुद्ध भले जग में 
 बुद्ध पर  भारी बस  तुम  थी ;

इतिहास झुका तेरे आगे 
देख उजला   मन का दर्पण ,
एकमात्र पूंजी पुत्र जब
किया  बोधिसत्व को अर्पण ;

बुद्ध का अंतस भी भीग गया  होगा  
देख तुम्हारा  सूना तन - मन , 
चिर विरहणी, अनंत मन -जोगन  
विरह अग्न में तप हुई कुंदन  , 

बन आत्म गर्वा माँ  तुमने 
अधिकार अपने  पुत्र का मांगा !!
बुद्ध की  करुणा में   सराबोर हो 
तू बनी अनंत महाभागा !
जैसे जागी  थी , तू कपलायिनी ! 
ऐसे  कोई नहीं जागा !!


 
 चित्र --- गूगल से साभार |


शब्दन
https://shabd.in/post/62813/

 

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