मेरी प्रिय मित्र मंडली

शनिवार, 19 अगस्त 2017

सुनो मनमीत ------------ नवगीत -------

सुनो  --   मनमीत ---------नवगीत -



प्रेम  - पगे मन से आ मिल कर 
इक अमर - गीत लिखें हम -तुम ! 
हार के भी सदा जीती है 
जग में प्रीत लिखें हम - तुम !  

तन पर अनगिन जख्म सहे 
तब जाकर साकार हुई   ,
मंदिर में रखी मूर्त यूँ हुई 
पूज्य -पुनीत लिखें हम -तुम ! 
हार  के  भी सदा  जीती  है -
जग  में प्रीत  लिखे  हम  तुम ! 
जो उलझ गई तूफानों से 
वो भवसागर से पार हुई ,
उल्टी लहरों पर कश्ती ने  
रचा जीवन - संगीत लिखें हम- तुम !
हार  के  भी सदा  जीती  है 
जग  में प्रीत  लिखे  हम  तुम !! 
जब  राह ना  मिलती  इस  जग  से 
तो चुनके  राह सितारों की ,
मिलते   जीवन  के पार  कहीं 
वो  मन के  मीत  लिखें  हम -तुम !!
हार  के  भी सदा  जीती  है 
जग  में प्रीत  लिखे  हम  तुम !! 

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