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शनिवार, 8 सितंबर 2018

तुम्हें समर्पित सब गीत मेरे--

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मीत कहूं,मितवा कहूं ,
क्या  कहूँ  तुम्हें   मनमीत मेरे ?
 नाम तुम्हारे ये शब्द  मेरे
 तुम्हें समर्पित सब गीत मेरे !!


 हर बात  कहूं  तुमसे मन की  

 कह अनंत सुख पाऊँ मैं ,
 निहारूं नित मन- दर्पण में  
 तुम्हें  स्व -सम्मुख   पाऊँ मैं;
सजाऊँ  ख्वाब नये  तुम संग -
 भूल, ये  गीत -अतीत मेरे  !!

सृष्टि में जो ये प्रणय का
अदृश्य  सा महाविस्तार है ,
जो युगों से है अपना 
 वही इसका दावेदार है ,
बंधने नियत थे तुम संग 
जन्मों के बंध पुनीत मेरे !!
  
अनुराग बन्ध में सिमटी मैं 
यूँ ही पल- पल जीना   चाहूँp ,
सपन- वपन कर डगर पे साथी 
संग तुम्हारे चलना  चाहूँ  ,
तुम्हारे प्यार  से हुए हैं जगमग 
ये नैनों के दीप मेरे  !!
 नाम तुम्हारे हर  शब्द  मेरे
 तुम्हें  समर्पित सब गीत मेरे !!

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 धन्यवाद शब्दनगरी --------

रेणु जी बधाई हो!,

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धन्यवाद, शब्दनगरी संगठन
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