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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

सुन जोगन !--- कविता [ Hindi poem]

  

सुन जोगन हुए किसके जोगी ?
ये व्यर्थ लगन मत मन कर रोगी !

पग जोगी के काल का फेरा 

एक जगह कहाँ उसका डेरा ?

कहीं दिन तो कहीं रात बिताये -

बादल सा उड़ लौट ना आये !

झूठा  अपनापन जोगी  का, 

तन उजला ,मैला मन जोगी  का ! 

 मत सजा  ये  मिथ्या सपने, 

बेगाने कब हुये हैं अपने  ?? 

क्यों ले जीवन भर का रोना

ना जोगी ने तेरा होना  !

जिसने  जोगी संग प्रीत लगायी -

करी विरह  के संग  सगाई !! 

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