
सुना है हिमालय हो तुम !
शिव के तुम्हीं कैलाश हो -
चित्र ------- गूगल से साभार -- ----------------------------------------------------------------------------------------
सुदृढ़ , अटल और अविचल
जीवन का विद्यालय हो तुम ! !
शिव के तुम्हीं कैलाश हो -
माँ जगदम्बा का वास हो ,
निर्वाण हो महावीर का
ऋषियों का चिर - प्रवास हो ;
ज्ञान - भक्ति से भरा -
बुद्ध का करुणालय हो तुम ! !
युगों से अजेय हो
वीरों की विजय हो तुम ,
लालसा में शिखर की
साहस का गन्तव्य हो तुम ;
संघर्ष का उत्कर्ष हो
नीति का न्यायालय हो तुम ! !
कवियों का मधुर गान हो
मुरली की मीठी तान हो ,
शीतल उच्छवास सृष्टि का
राष्ट्र का अभिमान हो ;
नभ के संदेशे बांटता -
मेघों का पत्रालय हो तुम ! !
हिम - शिखरों से सजा
माँ भारत का उन्नत भाल हो ,
टेढ़ी नजर से ताकते
शत्रु का महाकाल हो ;
बसा भारत कण -कण में जिसके
कश्मीर से मेघालय हो तुम ! !
सुदृढ़ , अटल और अविचल -
जीवन का विद्यालय हो तुम ! !
सुना है हिमालय हो तुम !!!
अनमोल टिप्पणी -- गूगल से साभार --
जननी के हिम किरीट की अभ्यर्थना में गाये गए गीत की भाषा भी सागरमाथा की तरह दिव्य , विराट! आपकी लेखनी से भाव प्रवणता उसी कल कल गति से प्रवाहित हो रही है जैसे हिमालय की गोद से निःसृत गंगा! आपकी लेखनी की प्रांजलता अमर हो. बधाई!
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 14 अगस्त 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार प्रिय एकलव्य -----
हटाएंआदरणीय रेणु जी, हलचल पर आपकी इस उत्कृष्ट रचना को स्थान मिलने हेतु बधाई। मेरी अनंत शुभकामनाएँ। आप श्रेष्ठ रचनाकार बन कर उभरें।
जवाब देंहटाएंआदरणीय पुरुषोत्तम जी आपके शब्द प्रेरणा से भरे हैं -- हार्दिक आभार आपका |
हटाएंबहुत ही लाजवाब ... मौन तपस्वी सा हिमालय ... उच्च उन्नत भाल प्रेरणा का स्त्रोत हिम शिखर देश का भाल है ... देवों का वास हिम आलय है ... बहुत ही उकृष्ट रचना है ...
जवाब देंहटाएंआदरणीय दिगम्बर जी -- सस्नेह आभार आपका ----
हटाएंहिमालय की महिमा बखान करती सुंदर पंक्तियाँ...
जवाब देंहटाएंआदरनीय अनीता जी -- आपके अनमोल शब्द प्रेरक हैं हार्दिक आभार आपका |
हटाएंलाजवाब प्रस्तुति !
जवाब देंहटाएंआदरणीय राजेश जी आभारी हूँ आपकी ------
हटाएंबहुत सुन्दर हिमालय बंदन.....
जवाब देंहटाएंलाजवाब प्रस्तुति....
आदरणीय सुधा जी आभारी हूँ आपकी |
हटाएंबहुत खूब रेणुजी ! मेरी एक कविता की पंक्तियाँ आपके लिए....
जवाब देंहटाएं"तू चिर तापस, तू अडिग अचल
मेरा मन अस्थिर, अज्ञानी,
कुछ कुछ चंचल !
तू शीतल स्नेह बहाए है
आवाहन करे बुलाए है
पर मैं ना जानूँ लक्ष्य कहाँ,
शापित आत्मा सी दूर यहाँ
मैं भोग रही अज्ञातवास !!!
आना तेरे पास, हिमालय !
आना तेरे पास !!!
आदरणीय मीना जी ------- अभिभूत हूँ आपकी इस श्रेषठ काव्यात्मक टिप्पणी से जो मूल रचना से कहीं श्रेष्ठ है और इसके अधूरे भावों को पूरा करने में सक्षम है | सचमुच हिमालय का सबसे सुंदर रूप इसका तापस रूप है जिसकी कामना मोक्ष का द्वार है | बहुत आभारी हूँ आपने अपना अनमोल समय मेरे लिए भरपूर दिया |
हटाएंबहुत ही उकृष्ट रचना
जवाब देंहटाएंआदरणीय संजय जी आभारी आपकी -- जो आपने रचना पढ़ी
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 15 जुलाई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंआदरणीय दीदी -- आपके सहयोग की आभारी रहूंगी | सादर |
हटाएंशानदार रचना
जवाब देंहटाएंशिव के तुम्ही कैलाश हो -
माँ जगदम्बा का वास हो ,
निर्वाण हो महावीर का --
ऋषियों का चिर - प्रवास हो ;
ज्ञान - भक्ति से भरा -
बुद्ध का करुणालय हो तुम ! !
प्रिय अनुराधा जी -- सस्नेह आभार आपका |
हटाएंसुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंआदरणीय ओंकार जी-- बहुत दिनों के बाद ब्लॉग पर आपके आने से बहुत ख़ुशी हुई |रचना पसंद करने के लिए सादर आभार आपका |
हटाएंवाह रेनू बहन अतिउत्तम मन मे आह्लाद जगाती सिद्धत्व को प्रेरित करती पावन सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंहिम से आच्छादित दित ये पर्वत श्रृंखलाऐं
मौन तपस्वियों सी आत्म चेतना के भाव जगाती
हमारे देश भाल पर मुकुट सी सुशोभित ।
प्रिय कुसुम बहन -- आपकी स्नेह पगी पंक्तियों ने मेरी रचना को नया अर्थ दे दिया है | हिमालय को समर्पित इन भावपूर्ण पंक्तियों से रचना के विषय को विस्तार मिला है | हृदयतल से आभार आपका | सस्नेह |
हटाएंवाह!!प्रिय बहन रेनू जी ,बहुत ही खूबसूरत शब्दों में हिमालय वंदन किया है आपने ...लाजवाब!!
जवाब देंहटाएंसस्नेह आभार प्रिय शुभा बहन|
हटाएंहिम - शिखरों से सजा --
जवाब देंहटाएंमाँ भारत का उन्नत भाल हो ,
टेढ़ी नजर से ताकते -
शत्रु का महाकाल हो ;
कण -कण में बसा भारत जिसमे -
कश्मीर से मेघालय हो तुम ! !
आहा... बहुत ही सुंदर
सुंदर बिम्ब
आदरणीय लोकेश जी -- आपकी आहा से मन को कितनी ख़ुशी हुई लिख नहीं सकती | आप जैसे कलम के धनी रचनाकार के शब्द मेरे लिए अतुलनीय हैं | आभार नाही बस सादर नमन |
हटाएंहिम - शिखरों से सजा --
जवाब देंहटाएंमाँ भारत का उन्नत भाल हो ,
टेढ़ी नजर से ताकते -
शत्रु का महाकाल हो ;
कण -कण में बसा भारत जिसमे -
कश्मीर से मेघालय हो तुम ! !
बहुत सुन्दर रचना रेनू जी ... बधाई
आदरनीय वन्दना जी-- सादर आभार आपके निरंतर प्रोत्साहन का |
हटाएंबहुत बढ़िया लिखा है रेनू
जवाब देंहटाएंआदरणीय शैल जी -- आपके अनमोल शब्दों के लिए हार्दिक आभार |
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हटाएंRPSMT 4D
कमाल लिखती हैं आप न सिर्फ रचनाएँ बल्कि किसी अन्य की रचनाओं पर प्रतिक्रिया स्वरूप जो दो शब्द लिखती हैं वो भी।
आपकी मनभावन छवि बन गयी है मेरे मानस पटल पर।
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anuradha chauhan
+1
हिमालय की बेहद खूबसूरत रचना
32w
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Renu
+1
+RPSMT 4Dप्रिय अभिलाषा जी -- आपके स्नेह की आभारी हूँ | बस अपने मन से दूर कभी मत करना |
32w
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Renu
+1
+प्रिय अनुराधा जी -- आभारी हूँ आपकी सराहना के लिए |
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RPSMT 4D
+Renu इतनी प्यारी हैं आप फिर सवाल ही नहीं उठता।
शिव के तुम्ही कैलाश हो -
जवाब देंहटाएंमाँ जगदम्बा का वास हो ,
निर्वाण हो महावीर का --
ऋषियों का चिर - प्रवास हो ;
ज्ञान - भक्ति से भरा -
बुद्ध का करुणालय हो तुम ! !
वाह.....
लाजवाब सृजन
प्रिय रविन्द्र जी -- आभारी हूँ आपने रूचि से रचना को पढ़ा और अपने अनमोल विचार दिए |
हटाएंहिमालय सी महिमामयी शैली में ही हिमालय वंदना भी। वाह!
जवाब देंहटाएंआदरणीय विश्वमोहन जी -- आपके शब्द मेरे लिए सदैव ही प्रेरक रहे हैं | सादर आभार |
हटाएंबहुत ही सुन्दर हिमालय की महिमा सखी 👌👌
जवाब देंहटाएंसादर
प्रिय अनीता -- आपके सुंदर शब्दों के लिए हार्दिक आभार |
जवाब देंहटाएंखूबसूरत रचना 👌👌👌
जवाब देंहटाएंप्रिय नीतू आपका स्वागत और आभार | बहुत दिनों बाद आप ब्लॉग पर आई बहुत अच्छा लगा | सस्नेह -
हटाएंआदरणीया मैम,
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत बहुत........... सुंदर रचना। पढ़ कर मन आनंदित भी हुआ और श्रद्धा- भाव से भी भर गया। आपने हिमालय के बहुत ही विलक्षण रूप का दर्शन कराया जिसके लिये मेरे पास कोई भी टिप्पणी ऐसी नहीं है जो इस सुंदर अनुभव का वर्णन करे।
माँ और नानी को भी पढ़ कर सुनाया। उन्हें भी बहुत सुंदर लगी। माँ कह रही थी यह कविता इतनी सुंदर है कि किसी विद्यालय की हिंदी के पाठ्य पुस्तक में इसका स्थान होना चाहिये।
बहुत ही प्यारी रचना के लिये हृदय से आभार ।
प्रिय अनंता , ये मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि तुम्हारे माध्यम से मेरी रचनाएँ तुम्हारी आदरणीय नानी जी और माँ ने भी सुनी | और हिमालय पर कुछ भी लिखना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है |तुम्हें मेरा प्यार और आपकी नानी जी को मेरा सादर प्रणाम और आभार | आपकी मम्मी के लिए भी मेरा हार्दिक स्नेह और आभार |मेरी रचना से कहीं सुंदर तुम्हारे भोले- भाले शब्द हैं |
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