मेरी प्रिय मित्र मंडली

शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

तुम्हारी चाहत में


 
 


🙏🙏🌷आभार स्नेही पाठक वृंद🙏🙏🌷😊 ब्लॉग का चार वर्ष पूरे कर,  पाँचवे वर्ष में प्रवेश और 110वीं रचना।😊


 


तुम्हारी चाहत में नज़रबन्द हूँ,

अनगिनत इनायतों की क़र्ज़मंद  हूँ | 


मैं कहाँ  !तुम कहाँ !

मैं जमीं, तुम आसमां !

मेरा तुम्हारा मेल, है बेमेल इस कदर

रेशमी लिबास पर टाट का  पैबंद हूँ !


ना सुनाई देगी सदा,तुम्हें  ये सदा मेरी,

हो  जायेंगी  एक दिन, तुमसे राहें  जुदा मेरी ,

महकेगा कभी यादों में ,गुलाब की तरह

तुम्हारी जिंदगी का वो क्षणिक आनंद हूँ ! 

 

उम्र भर रहा  तमाशा खूब मेरा,

था  कहाँ कोई तुम बिन  वज़ूद मेरा,

कब  कोई जानता था मुझे ,मेरे नाम से

तुम्हारी हस्ती से जुडी ,  इसलिए बुलंद हूँ!


देखा  किसी ने  ना नज़र भर कभी , 

ना आ सकी खुशियों   की ,उजली सहर कभी , 

गुनगुना सका ना जिसे कोई प्यार से 

 बेसुरी -सी  रागिनी, एक अधूरा छंद  हूँ !

  तुम्हारी चाहत में नज़रबन्द हूँ,///

 


 

78 टिप्‍पणियां:

  1. वाह.. वाह दी,
    कितनी खूबसूरत प्रेम कविता,
    सर्वस्वसमर्पण, आत्मा के अनुबंध का मधुर,पवित्र और अलौकिक गीत।
    मन को छू रही है हर बंध दी।
    सरल,सहज शब्दों में कल-कल छलकती किसी मीठे झरने सी अभिव्यक्ति।
    -----
    ये बंध तो ज़ुबान पर चढ़ गया।

    मैं कहाँ !तुम कहाँ !
    मैं जमीं, तुम आसमां !
    मेरा तुम्हारा मेल, है बेमेल इस कदर
    रेशमी लिबास पर टाट का पैबंद हूँ
    ---
    बधाई दी।
    सस्नेह।

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    1. प्रिय श्वेता, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत आभार। तुम्हें रचना अच्छी लगी , मेरा लिखना सफ़ल हुआ।

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  2. मैं कहाँ !तुम कहाँ !
    मैं जमीं, तुम आसमां !
    मेरा तुम्हारा मेल, है बेमेल इस कदर
    रेशमी लिबास पर टाट का पैबंद हूँ !

    सुनाई देगी सदा,तुम्हें ये सदा मेरी,
    हो जायेंगी एक दिन तुमसे, ये राहें जुदा मेरी ,
    महकेगा कभी यादों में ,गुलाब की तरह
    तुम्हारी जिंदगी का वो क्षणिक आनंद हूँ !

    उम्र भर रहा तमाशा खूब मेरा,
    था कहाँ कोई तुम बिन वज़ूद मेरा,
    कब कोई जानता था मुझे ,मेरे नाम से
    तुम्हारी हस्ती से जुडी , इसलिए बुलंद हूँ!

    ना देखा किसी ने नज़र भर कभी ,
    आ ना सकी खुशियों की उजली सहर कभी ,
    गुनगुना सका ना जिसे कोई प्यार से
    बेसुरी -सी रागिनी, एक अधूरा छंद ..वाह,खूबसूरत अंतराओं से सजी आपकी ये रचना पूर्ण समर्पण के भाव को समर्पित कर रही,अर्तरमन मे बसी सुंदर कोमल पंक्तियां प्रस्फुटित हो गईं,बहुत बधाई और शुभकामनाएं प्रिय रेणु जी।

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    1. प्रिय जिज्ञासा जी, रचना पर उत्साहवर्धक स्नेहिल भावों के लिए ससनेह आभार। ये स्नेह बना रहे।

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  3. अशेष शुभकामनाएँ
    पाँचवीं सालगिरह
    सरल,सहज शब्दों का सस्नेह बन्धन
    सादर..

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    1. आपके स्नेह की आभारी रहूंगी आदरणीय दीदी।

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 14 जुलाई 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. पांच लिंक मंच के सहयोग की सदैव आभारी हूं आदरणीय दीदी।

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  5. ब्लॉग के पाँच वर्ष पूरे होने पर ढेरों बधाई …
    एक भावनाओं से परिपूर्ण रचना से इतने वर्ष पूर्ण होने की गहरी अनुभूति
    को लिखा है आपने …
    बारो साई रागिनी, एक अधूरा छंद … जीवन ऐसा ही लगता है कई बार निराशा और समर्पण … दोनो हाई भावों में ..
    पर सच में जीवन ऐसा नहीं है शायद …
    रेशमी लिबास में टाट का पैबंद भी नहीं है क्योंकि आशा और विश्वास यदि एक भी जीवन में हम भर सकें तो सार्थक हो जाता है ये जीवन सितारे की तरह चमकने लगता है …
    बहुत सुंदर रचना है …

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    1. आदरणीय दिगंबरजी, रचना पर सारगर्भित प्रतिक्रिया स्वरूप आपके विचारों का स्वागत करती हूं। आपने सकारात्मक भावों के साथ जोड़कर विषय वस्तु को विस्तार दिया है। शब्दनगरी से लेकर ब्लॉग तक आपके निरंतर सहयोग की आभारी हूं। सादर

      हटाएं
  6. आप इतना बेमेल क्यों बताना चाह रहीं है।यह किस तरह की निराशा? साथ ही..यह भी।
    "तुम्हारी चाहत में नज़रबन्द हूँ,
    अनगिनत इनायतों की क़र्ज़मंद हूँ"

    भावों में द्वंद्व दिखा।

    हाँ, रचना के तौर पर उम्दा लगी। बधाई इस कविता के लिए।

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    1. आदरणीय अयंगर जी , रचना, रचना के तौर पर आपको अच्छी लगी , जानकर अच्छा लगा | और विनम्रता से कहना चाहती हूँ , निराशा नहीं ये कृतज्ञ भाव की रचना है | रचना में इतनी रूचि लेने के लिए सादर आभार |शब्दनगरी से ही आपकी बेबाक प्रतिक्रिया मेरे लिए विशेष रही है |सादर -

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  7. ब्लॉग के पाँचवें वर्ष में प्रवेश की शुभकामनाएँ । बहुत दिनों से ब्लॉग आवाज़ दे रहा था तुमको , इस बच्चे की याद तुमको उसकी सालगिरह पर आई ..... अब न भुलाना ...

    इस रचना में कुछ ऐसा लग रहा कि कहना तो और कुछ चाह रही हो और कह कुछ और रही हो .... जहाँ पूर्ण समर्पण वहां स्वयं को टाट का पैबंद तो नहीं मान सकतीं ।
    अपने से बहुत ज्यादा मान देने के लिए ऐसा उदाहरण दे रही हो तो तुम्हारे कहे को मान लेते हैं । जो सच तो कतई नहीं है ।
    यूँ तो ....
    बेसुरी रागनी भी
    घोल देती है
    कानों में मिश्री
    जहाँ अपनापन होता है
    अधूरा छंद भी
    पढ़ जाते हैं पूरा
    जहाँ मन मिला होता है ।

    बहुत सारी शुभकामनाएँ ..... ब्लॉग को आबाद रखने के लिए ...
    सस्नेह

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    उत्तर
    1. प्रिय दीदी , आपकी काव्यात्मक और सकारात्मक प्रतिक्रिया ने मेरी रचना का मोल बढ़ा दिया है |आपने सच कहा जहाँ अपनापन होता है वहां भाव बदल जाते हैं पर लघुता और गुरुता का अंतर अवश्य रहता है |बस गुरुता का मान बढाने के लिए रचना लिखी गयी | और अब निश्चित रूप से इस बच्चे पर ही ध्यान केन्द्रित रहेगा | आपके स्नेह के लिए आभार नहीं बस मेरी शुभकामनाएं आपके लिए |

      हटाएं
  8. बहुत बहुत सुन्दर कोमल भावों से सजी मधुर रचना | शत शत शुभ कामनाएं , आशीष |

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    1. ब्लॉग पर आपकी उपस्थिति और स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीय आलोक जी। शब्द नगरी से ब्लॉग तक आपका उत्साहवर्धन बहुत प्रेरक रहा है। सादर

      हटाएं
  9. प्रिय रेणु, किसी के प्रति दिखाई गई कृतज्ञता अति विनम्र शब्दों में इस रचना में प्रकट हुई है। कृतज्ञ भाव में होना और किसी के अहसान को न भूलना सज्जन व्यक्ति का लक्षण है। कई बार हम किसी का अहसान मन ही मन मानते हैं परंतु उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। "विद्या विनयेन शोभते"
    आपने अपनी काव्य प्रतिभा में भी कितनी विनम्रता का परिचय दिया है यह कहकर -
    मैं कहाँ !तुम कहाँ !
    मैं जमीं, तुम आसमां !
    मेरा तुम्हारा मेल, है बेमेल इस कदर
    रेशमी लिबास पर टाट का पैबंद हूँ !
    परंतु कविता का इस बंद में तो वेदना की निर्झरी बह चली है -
    देखा किसी ने ना नज़र भर कभी ,
    आ ना सकी खुशियों की ,उजली सहर कभी ,
    गुनगुना सका ना जिसे कोई प्यार से
    बेसुरी -सी रागिनी, एक अधूरा छंद हूँ !

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    1. प्रिय मीना, आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया ने रचना के मर्म को प्रकट कर रचना को सार्थक कर दिया। आपके उत्साहवर्धन से ही रचना को ब्लॉग पर डाला है। मेरे विनम्र प्रयास पर मनोबल बढ़ाते आपके शब्द अनमोल हैं, जिसके लिए हार्दिक आभार आपका।

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  10. शुभकामना है कि आप लगातार लिखती रहें, आपके ब्लॉग की पाँचवीं सालगिरह मुबारक। सस्नेह।

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    1. प्रिय मीना, लिखना आजकल अवरुद्ध सा है। ये पुरानी रचनाएँ डाल रही हूं। आशा है निकट भविष्य में सब नियमित होगा।

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  11. ब्लॉग के चार वर्ष पूर्ण और पांचवे वर्ष में प्रवेश...,सुखद अनुभूति । बहुत बहुत बधाई आपको । हृदयस्पर्शी बंधों से सजी बहुत सुन्दर रचना । लिखती रहिए रेणु जी बहुत अच्छा लिखती हैं आप । पुन: बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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    1. प्रिय मीना जी, बहुत -बहुत आभार आपकी उपस्थिति और स्नेहिल प्रतिक्रिया का । आप सब के स्नेह की सदैव आकांक्षी हूं।

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  12. बधाई और शुभकामनाएं रेणु जी। आपकी कोई रचना आपके किसी ब्लॉग (उच्छवास को छोड़कर) पर लम्बे समय के उपरांत पढ़ने को मिली। आपके प्रशंसक भी आपकी लेखनी की चाहत में नज़रबंद ही हैं।

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    1. आपके उत्साहवर्धक शब्दों के लिए हार्दिक आभार जितेंद्र जी। ब्लॉग पर मैं लिख नहीं पा रही आशा है जल्द ही सब नियमित हो जायेगा। सादर

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  13. उत्तर
    1. हार्दिक आभार सतीश जी! ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

      हटाएं
  14. ब्लॉग के चार वर्ष पूर्ण और पांचवे वर्ष में प्रवेश एवं 110वीं रचना की बहुत बहुत बधाई आपको।लम्बे अंतराल के बाद आपकी रचना का आस्वादन मिला हमेशा की बहुत ही हृदयस्पर्शी भावपूर्ण सृजन...निर्लिप्त मनोभाव से अपनी चाहत में सर्वस्व समर्पण कर अपने को तुच्छ एवं प्रिय को सम्पूर्ण सम्मान दर्शाती बेहद अद्भुत एवं उत्कृष्ट सृजन।
    उम्र भर रहा तमाशा खूब मेरा,
    था कहाँ कोई तुम बिन वज़ूद मेरा,
    कब कोई जानता था मुझे ,मेरे नाम से
    तुम्हारी हस्ती से जुडी , इसलिए बुलंद हूँ!
    वाह!!!
    लाजवाब।

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  15. प्रियसुधाजी, ब्लॉग पर चार साल की रचना यात्रा में आपका निरंतर सहयोग अविस्मरणीय है । आपने सदैव मेरी रचनाओं के मर्म को पहचाना है। आपका साथ यूं ही बना रहे। आपके स्नेहिल शब्दों की आभारी हूं।

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  16. बधाई ब्लॉग के जन्मदिन पर!!सुन्दर रचना हेतु शुभकामनाएं!!

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    उत्तर
    1. हार्दिक आभार अनुपमा जी। ब्लॉग पर आपका स्वागत है 🙏🙏

      हटाएं
  17. ब्लॉग के चार वर्ष पूरे करने और पाँचवें जन्मोत्सव के अवसर पर हार्दिक बधाई असीम शुभकामनाओं के संग स्वीकार करें

    टाट का पैबंद होने को निरस्त करती है क्षणिक आनंद की भावानुभूति
    तो
    बुलंद हैं तो पूरा छंद हो गया

    व्याकुल मनोस्थिति का सुन्दर चित्रण
    उम्दा सृजन हेतु भी बधाई

    ब्लॉग पर आए आपकी टिप्पणियाँ आपकी लेखनी को विशिष्टता प्रदान करती हैं
    हार्दिक आभार आपका



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    उत्तर
    1. हार्दिक आभार प्रिय दीदी और ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आपकी उपस्थिति और सकारात्मक भाव दोनों ऊर्जावान हैं। 🙏🙏

      हटाएं
  18. "महकेगा कभी यादों में ,गुलाब की तरह
    तुम्हारी जिंदगी का वो क्षणिक आनंद हूँ!"
    और
    "उम्र भर रहा तमाशा खूब मेरा,
    था कहाँ कोई तुम बिन वज़ूद मेरा !?" .. दो व्यवहारिक कटु सत्य से सजे भावनात्मक उद्गार वाली रचना, वह भी किसी मंच विशेष को समर्पित .. पर .. इस तरह आभासी सालगिरह के काम नहीं चलेगा .. शायद ...
    एक केक तो बनता ही है .. आज की अपनी प्रस्तुति में एक आभासी केक चिपका कर .. और भी ललचा 😛😛 दिया है यशोदा जी ने .. अब तो online delivery का युग है .. केक ना खिलाने का बहाना भी नहीं चलेगा 😀😀 .. शायद ...
    ख़ैर ! .. आप ही के बहाने पुनः "पाँच लिंकों का आनन्द का" की सालगिरह की बधाई .. बस यूँ ही ...

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    1. सुबोध जी ,
      सबसे पहले आपकी मधुर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ | ब्लॉग पर उपस्थित हो , रचना के मर्म को पहचानकर , आपने जो प्रतिकिया दी है वह अनमोल है | दूसरे ,आपने सच कहा कि ऑनलाइन का जमाना है | Zomato app का जमाना है | पता अदद चाहिए केक सस्नेह आप तक पहुँच जाएगा | पुनः आभार आपके स्नेहिल उद्गारों का 🙏💐😊😊

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  19. कब कोई जानता था मुझे ,मेरे नाम से

    तुम्हारी हस्ती से जुडी , इसलिए बुलंद हूँ!---खूब बधाई। बहुत ही सुंदर संकलन और अच्छी रचनाएं...सभी को खूब बधाई। ब्लॉग के माध्यम से आप इसी तरह बेहतर से बेहतर की ओर अग्रसर होती रहें...मेरी शुभकामनाएं।

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    उत्तर
    1. रचना पर सार्थक प्रतिक्रिया और ब्लॉग पर उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार संदीप जी🙏💐

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  20. उत्तर
    1. हार्दिक आभार सुशील जी। विगत चार सालों में आपका सहयोग प्रेरक और उत्साहवर्धक रहा है। सादर🙏🙏💐💐

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  21. यह कविता केवल आपके लिए...आपकी इस खुशी के लिए...

    हम
    जितना भी जीते हैं
    हम जितना भी मुस्कुराते हैं
    हम जितना भी
    अपने को पहचान पाते हैं
    हम जितना भी उस परमपिता को
    जान पाते हैं
    यह सब
    निर्भर करता है
    हम पर
    और
    हमारे करीब रहने वाले
    उस हमारे खूबसूरत
    चिंतन पर
    जिससे हम
    दुनिया को देख पाते हैं एक अनूठी नजर से।
    आपका सुख
    आपको
    बेहतर बना सकता है
    तभी
    जब
    आप उस सुख
    के गहनतम
    होकर
    उसे सर्वव्यापी बनाना सीख जाओ।

    खूब बधाई मेरी ओर से....अभी बहुत सी गहन रचनाएं आपको इसी तरह पूरी जिम्मेदारी से पोस्ट करनी हैं...।

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    1. प्रिय संदीप जी, अभिभूत हूँ आपकी रचना से , जो सकारात्मकता से भरी और बहुत ही प्रेरक है | ये रचना मेरे ब्लॉग पर थाती रूप में अंकित रहेगी | आपकी ये उर्जावान अभिव्यक्ति मेरे लिए अमूल्य उपहार है | आभार कहूँगी तो इसकी गरिमा न रहेगी बस मेरी हार्दिक शुभकामनाएं आपके लिए 🙏💐

      हटाएं
  22. प्रिय सखी रेणु जी ,क्षितिज की पाँचवीं वर्षगांठ टर हार्दिक अभिनंदन 💐💐💐💐💐 बस एसे ही खूबसूरत सृजन करते रहिये । बहुत ही खूबसूरत रचना ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी उपस्थिति और शुभकामनाओं के लिए सस्नेह आभार शुभा जी | ये स्नेह सदैव बना रहे |🙏🌷💐🌷🌷

      हटाएं
  23. "देखा किसी ने ना नज़र भर कभी "
    इस बात को तो मैं नहीं मानती "तुम तो सबकी नज़र में ही बसी हो सखी...हर नज़र को तुम्हारा ही इंतज़ार था....शुक्र है तू जिसकी नज़र में कैद थी वह से छूट कर हम सब के पास भी आयी तो सही।
    "तुम्हारी चाहत में नज़रबन्द हूँ," तुम जिसकी चाहत में नज़र बंद हो रहों... पर कभी-कभी हमारी भी सुध लेलो हम भी तो तुम्हरे लेखन के कैद में है।
    वैसे ये हँसी-ठिठोली थी सखी के साथ....
    जहाँ तक तुम्हारी रचना की बात है उसकी प्रशंसा के लिए तो हमेशा शब्द कम पड़ते है।अब लिखती रहा करों फिर गुम ना हो जाना...
    ब्लॉग का चार वर्ष पूरे करने के लिए और तुम्हारी 110वीं रचना के लिए बहुत बहुत शुभकामनायें,ढेर सारा स्नेह तुम्हे
    देर से बधाई देने पहुंची हूँ इसके लिए क्षमा चाहती हूँ।



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    1. प्रिय कामिनी , तुम्हारी उपस्थिति और स्नेह दोनों अनमोल हैं सखी | ये तुम्हारा स्नेह है जो रचना का ऐसा मूल्यांकन करता है | ये स्नेह बना रहे सदा | स्नेहिल , मधुर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभारसखी | 🙏🌷💐🌷💐

      हटाएं
  24. पहले तो पांचवीं सालगिरह की बधाई
    आप ऐसा ही खूबसूरत लिखती रहें
    शुभकामनाएं

    बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत बधाई और शुभकामनाएं

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    1. हार्दिक आभार और अभिनंदन है भारती जी 🙏💐🌷💐|

      हटाएं
  26. बेहद खूबसूरत रचना 👌 पाँचवी सालगिरह की बहुत-बहुत बधाई रेणु जी।

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    उत्तर
    1. अनुराधा जी, बहूत बहुत आभारी हूं आपके स्नेहिल उद्गारों के लिए 🙏🌷💐💐🌷

      हटाएं
  27. बहुत सुन्दर रचना

    बहुत बधाई और शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  28. तुम्हारी चाहत में नज़रबन्द हूँ,

    अनगिनत इनायतों की क़र्ज़मंद हूँ |

    -गजब

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    उत्तर
    1. आपका हार्दिक आभार और अभिनंदन समीर जी। पुनः ब्लॉग पर आपका आना मेरा सौभाग्य है।

      हटाएं
  29. मैं कहाँ !तुम कहाँ !
    मैं जमीं, तुम आसमां !
    मेरा तुम्हारा मेल, है बेमेल इस कदर
    रेशमी लिबास पर टाट का पैबंद हूँ !

    ना सुनाई देगी सदा,तुम्हें ये सदा मेरी,
    हो जायेंगी एक दिन, तुमसे राहें जुदा मेरी ,
    महकेगा कभी यादों में ,गुलाब की तरह
    तुम्हारी जिंदगी का वो क्षणिक आनंद हूँ !

    बहुत ही उम्दा और दिल को छू जाने वाली रचना !
    सच में बहुत ही बेहतरीन रचना है जितनी भी तारीफ की जाए कम हैं! लेकिन फिर भी मैं जितने तारीफ के शब्द होते हैं वो लिख देती हूँ, लाजवाब, बेमिसाल, अतिसुन्दर,उम्दा, बेहतरीन, रहनीय, शानदार , गज़ब और कलम टोड़ रचना!
    आपने यादों का जिक्र किया है तो मैं भी कुछ कहना चाहतीं हूँ-
    "जो आज वक्त है, वो कल यादों में बदल जाएगा!
    जब भी इस यादों की गलियों से गुजरेंगे तो गला भर आएगा!!"

    कुछ यादें ऐसी होती हैं जो खूबसूरत तो बहुत होती है पर जब भी उन यादों की गलियों से गुजरो तो आंखें नम कर देती हैं! जिंदगी के कुछ क्षणिक आनंद पूरी जिंदगी के लिए लबों पर एक अजीब सी मुस्कान छोड़ जाते हैं, जो एक साथ वर्तमान के दर्द और बीते हुए खुशी के पल को बयां करती है

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    1. प्रिय मनीषा,तुम्हारी ये सारगर्भित प्रतिक्रिया मन को छू गई। तुम्हें रचना पसंद आईं समझो मेरा लेखन सफ़ल हुआ। तुमने रचना में डूबकर इसे आत्मसात किया और इतनी भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी जिसके लिए मैं आभार लिखूं तो काफ़ी ना होगा। बस मेरी शुभकामनाए और स्नेह तुम्हारे लिए।
      याद रखना, जीवन चलने का नाम है बस यही यथार्थ है इसका और मिलना, बिछड़ना इसके स्थाई पड़ाव हैं। तुम्हारी काव्यात्मक पंक्तियां लाज़वाब हैं 👌👌👌👌👌 यूं ही लिखती आगे बढ़ती रहो सस्नेह 🌷🌷❤️❤️🌷

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  30. "धरा प्रेयसी,अम्बर प्रेमी और अभिसार का बीज है,
    अंतरिक्ष में प्रेमालिंगन, इसी का नाम 'क्षितिज' है।".....'क्षितिज' के वर्षगाँठ की माँगलिक बधाई और भविष्य की अशेष शुभकामनाएँ!!!!

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  31. आपके अनमोल आशीष और भावपूर्ण काव्यात्मक प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार आदरणीय विश्वमोहन जी । सादर 🙏🙏💐🌷

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  32. सुनाई दे रही है वो अनकही सदाएं जिसे हर्फो में कही नहीं गई । जिसे बस आत्म अनुभूति से ही जज्ब किया जा सकता है । हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई सदैव आपके लिए ।

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    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ अमृता जी | ये स्नेह सदैव बना रहे |

      हटाएं
  33. बहुत ही उम्दा और दिल को छूती रचना रेणु दी। हर किसी मे कुछ खास गुण होते है जैसे कि आप जब किसी भी पोस्ट पर टिप्पणी करती है तो वो सविस्तर और इतनी अच्छी होती है कि ऐसा लगता है कि उस रचना का एक एक शब्द आपने दिल से पढ़ा हो वो हुनर मुझ में नही है। इसलिए थोड़े में ही ज्यादा समझना।
    ब्लॉग के सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। आप इसी तरह अच्छा अच्छा लिखती रहे...

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    उत्तर
    1. प्रिय ज्योति जी , चार साल से आपका निरंतर मेरे ब्लॉग पर आना और अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराने के रूप में आपका स्नेह सदैव मिला है |आपके शब्द मेरे लिए विशेष रहे हैं | अत्यंत आभार आपके स्नेहिल उद्गारों के लिए |

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  34. कितनी सुंदरता से हृदय की अनुभूतियों को शब्द दिये!! बहुत खूब!!

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  35. ब्लाग का पाँचवे साल में प्रवेश बहुत ही हर्ष का विषय है रेणु बहन बहुत बहुत बधाई आपको।
    कम लिखती हैं पर बहुत खूब लिखती हैं आप ।
    आपकी रचनाओं में आत्मानुभूति होती है, ये रचना भी कितनी प्यारी है समर्पण के भाव आकिंचन्य हो कर हृदय स्पर्शी हो ग्रे सुंदर भाव सृजन ।
    पुनः बधाई बहन।

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    1. प्रिय कुसुम बहन , आपके स्नेहासिक्त प्रोत्साहन से रचना यात्रा में अभूतपूर्व सहयोग मिला है | सस्नेह आभार आपके प्यार भरे उद्गारों का |

      हटाएं
  36. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(०१-०८-२०२१) को
    'गोष्ठी '(चर्चा अंक-४१४३)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  37. उत्तर
    1. अहोभाग्यम !!पुनः अभिनन्दनम - सुस्वागतम अमृता जी !!!!!

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  38. प्रिय रेणु जी आपकी रचना जितनी भी बार पढ़ो मन नहीं
    भरता....बहुत ही अद्भुत है आपकी लेखनी...बस अब मना भी लो अपनी लेखनी को और तोड़ दो ये मौन...हमें इन्तजार है आपकी अप्रतिम रचनाओं का।

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    उत्तर
    1. प्रिय सुधा जी . ये आपका स्नेह है बस | अभिभूत हूँ आपके स्नेह से | पुनः अभिनन्दन और आभार |

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  39. दुबारा पढकर.आनंदित हूँ दी।
    आपकी लेखनी चलती रहे नित नवीन.सृजन गढ़ती रहे मेरी शुभकामनाएं हमेशा है।
    सस्नेह प्रणाम।

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    1. प्रिय श्वेता , इस स्नेह का कोई सानी नहीं | हार्दिक आभार और अभिनन्दन |

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  40. वाह!बहुत सुंदर सृजन दी।
    मन मोह लेता है आपका सृजन।
    हार्दिक बधाई 🌹
    सादर

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  41. इस बार तुम्हारी दृष्टि से पढ़ी है रचना । किसी के प्रति मन समर्पित हो तो ऐसे भब आने स्वाभाविक होते हैं ।
    हृदयतल से निकले बेहतरीन भाव ।
    लेकिन इस बच्चे को अभी भी संभाला नहीं है । इंतज़ार कर रहे हैं ।

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    उत्तर
    1. रचना पर आपके पुनः सूक्ष्मावलोकन और स्नेह भरे उद्गारों का हार्दिक आभार। कोशिश कर रही हूं धीरे- धीरे 🙏🙏🌷🌷

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