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रविवार, 23 जुलाई 2017

आई आँगन के पेड़ पे चिड़िया --- कविता --

आई  आँगन  के  पेड़  पे  चिड़िया ------- कविता

आई आँगन के पेड़ पे चिड़िया ,
उड़ती जाती फुर्र - फुर्र  ,
 चाल  चले मस्त  लहरिया !

राह  भूली थी  शायद 
 तब इधर आई , 
देख हरे नीम ने भी बाहें फैलाई ; 
फुदके पात- पात ,
 हर डाल पे घूमें , 
कभी सो जाती 
बना डाली का तकिया ! 
उल्लास में खोई --
 फिरे शोर मचाती , 
मीठा गाना गाती -
थोड़ा दाना चुग जाती , 
देख हँसे  खिलखिल मुन्ना ,
उदास थी अब  मुस्काई मुनिया ! 

हुआ भरा- भरा सा ,
सूना था आँगन, 
घर का हर कोना 
पुलक बना है मधुबन ;
तुम्हारे कारण आई -
ये  नन्ही   चिड़िया !
 ओ नीम ! तुम्हारा  बहुत शुक्रिया| ! !

चित्र -- निजी संग्रह -- -----------------------------------------------------------


33 टिप्‍पणियां:

  1. चिड़िया का देहरी पे आना ... खुशियों का संकेत है ... और ये संभव होता है पेड़ से ... तो उसका शुक्रिया तो बनता ही है ....

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    1. आदरणीय दिगंबर जी -- सचमुच चिड़िया हमारे जीवन का अभिन्न अंग है -- बहुत शुक्रिया आपका भी -- रचना का मर्म पहचानने के लिए ---------

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  2. यहाँ नीम का पेड़ और चिड़ियाँ का पेड़ पर उतरना मानों द्योतक है आपकी उड़ान भरती कल्पना और उनका छन्दों में खूबसूरती हे उतरना। इस बेहतरीन कल्पना हेतु बधाई

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    1. आदरणीय पुरुषोत्तम जी आपकी आभारी हूँ किआपने रचना पढ़ी |

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  3. प्रिय अमन --- बहुत आभारी हूँ आपकी जो आपने ब्लॉग पर आकर रचना पढ़ी |

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  4. नीम तुम्हारा बहुत शुक्रिया ! ! !
    खूबसूरत रचना।

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  5. चिड़िया का आंगन में फुदकना और पेड़ों पर चहचहाना कितना अच्छा लगता है ! खास तौर पर बाल मन को । बहुत खूबसूरत प्रस्तुति । बहुत खूब आदरणीया ।

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    1. आदरणीय राजेश जी सच कहा आपने | आभारी हूँ आपकी कि आपने रचना पढ़ी और इसका मर्म जाना |

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  6. उत्तर
    1. प्रिय शकुन्तला-- बहुत आभारी हूँ आपको रचना अच्छी लगी -------

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. ''लोकतंत्र'' संवाद के प्रथम अंक में आप सभी महानुभावों का स्वागत है।

    आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग पर 'बृहस्पतिवार' २८ दिसंबर २०१७ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  9. एक अच्छा संदेश देती हुई कविता कि अगर चिड़ियों का कलरव सुनना है तो हर आंगन नीम का पेड़ हो।

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    1. प्रिय बंधु-- सादर आभार और स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग पर --

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  10. सादर आभार -- आदरणीय विश्वमोहन जी |

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  11. वाह ! क्या कहने हैं ! खूबसूरत प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।

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    1. आदरनीय राजेश जी --- रचना पर आपकी दूसरी प्रतिक्रिया से बहुत खुश हूँ | आपकी वाह बहुत उत्साहवर्धक है | सादर आभार और नमन आपको |

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  12. वाह्ह्ह!
    आदरणीया दीदी जी सादर प्रणाम 🙏
    बेहद सुंदर मनभावन पंक्तियाँ हैं। नन्ही चिड़िया और नीम के पेड़ का यह नाता मन को छू गया।

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  13. रेणु दी,घर के आंगन में पेड़ हो और चीडियो का कलरव हो तो उस आनंद की बात ही कुछ और हैं। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  14. चिड़ियों का कलरव प्रभात की किरनों के साथ प्रातः कालीन आनन्द को द्विगुणित कर देता है, उत्तम सृजन

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय उर्मिला जी 🙏🙏😍😍

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  15. वाह!सखी ,नन्ही ,फुदकती ,चीं-चीं करती चिडिया कितनी अच्छी लगती है..।पर अब तो यदा-कदा ही दिखाई देती हैं ।

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    उत्तर
    1. हार्दिक आभार प्रिय शुभा जी,इस प्यारी से
      प्रतिक्रिया के लिए 🙏 🙏😍😍

      हटाएं

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