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विशेष रचना
आज कविता सोई रहने दो !
आज कविता सोई रहने दो, मन के मीत मेरे ! आज नहीं जगने को आतुर सोये उमड़े गीत मेरे ! ना जाने क्या बात है जो ये मन विचलित हुआ जाता है ! अना...

वाह !
जवाब देंहटाएंपेड़ और चिड़िया के बीच हुआ संवाद जीवन दर्शन की सुन्दर अभिव्यक्ति है।
आदरणीय रेणु जी का कल्पनालोक साहित्यिक सृजन में नए रंग भर रहा है।
मन को तरोताज़ा करती बेहतरीन रचना है जिसका संदेश एकदम स्पष्ट और व्यापक है।
बधाई एवं शुभकामनाऐं।
नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 14 -09 -2017 को प्रकाशनार्थ 790 वें अंक में सम्मिलित की गयी है। चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर। सधन्यवाद।
जवाब देंहटाएंआदरणीय रेणु जी इस रचना का शीर्षक भी प्रकाशित कीजिये ताकि हमें सहूलियत हो "पाँच लिंकों का आनन्द" में प्रकाशित करने में। धन्यवाद।
जवाब देंहटाएंआदरणीय रविन्द्र जी - आपके उत्साहवर्धन करते शब्द अनमोल हैं -- | बहुत आभारी हूँ कि आपने जल्दबाजी में हुई
जवाब देंहटाएंत्रुटि मुझे बताई | मैंने ठीक कर दी है |
स्वतःउन्माद लिए बोलती सी यह रचना अत्यन्त ही प्रेरक और सुरूचिपूर्ण है।।।
जवाब देंहटाएंमन बैरागी , आत्मगर्वा और आत्माभिमानी कहाऊँ-
नन्हे पाखी को सौंप गगन को- मैं कर्तव्य निभाऊं ;
आजन्म मुक्त और निर्बंध मैं –
मन चाहे जिधर - फूर्र से उड़ जाऊं ;
तारीफ की हदों से परे.... । आदरणीय रेणु जी, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
आदरनीय पुरुषोत्तम जी ------ आपके प्रेरक शब्द अनमोल हैं |
हटाएंअति सुंदर जीवन दर्शन,
जवाब देंहटाएंआदरणीय रेणु जी,
जीवन का संपूर्ण सार लिख दिया आपने
मनमोहक शब्द रचना एवं सुंदर सदेश से भरी आपकी बेजोड़ रचना।बहुत बहुत अच्छी लगी।
आदरणीय श्वेता जी -- अभिभूत करते आपके स्नेहासिक्त शब्दों से अभूतपूर्व उत्साहवर्धन हुआ है | सस्नेह हार्दिक आभार आपका |
हटाएंअति सुंदर लेखन..
जवाब देंहटाएंप्रिय अमन बहुत आभारी हूँ आपकी कि आप नियमित ब्लॉग पर आते हैं | सस्नेह शुभकामना आपको -----
हटाएंबहुत सुन्दर रचना।
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंआदरणीय सुशील जी --- सादर , सस्नेह आभार आपका आपके प्रेरक शब्दों के लिए ----
हटाएंबहुत सुंदर रचना ।
जवाब देंहटाएंकाल के माथे पर लिखा -ये कलरव अजर – अमर है
कविता , वाणी और वीणा में जो नित नए स्वर रचता है !!
अत्यंत सुंदर भाव ! अपने आप में एक संपूर्ण जीवन दर्शन को समेटे हुए।
हार्दिक बधाई रेणुजी।
आदरणीय मीना जी - स्नेह से भरे शब्दों के लिए आभारी हूँ आपकी ------
हटाएंआदरणीया रेणु जी बहुत ही सुन्दर दार्शनिक विचारों से परिपूर्ण रचना ! मेरे पास शब्द नहीं फिर भी कह रहा हूँ हृदय को स्पर्श कर गई आपकी कृति आभार "एकलव्य"
जवाब देंहटाएंप्रिय ध्रुव ----- आप ब्लॉग पर आये ----- बहुत आभारी हूँ आपकी --
हटाएंमाधुर्य का पर्याय बन-
जवाब देंहटाएंतू चहके मीठी पाग भरी;
कण-कण में स्पन्दन भर देती-
जब तू गूंजे आह्लाद भरी ;
बहुत ही सुन्दर.....
जवाब देंहटाएंलाजवाब प्रस्तुति...
आदरणीय सुधा जी ---- बहुत प्रेरणा भरे हैं आपके शब्द ------- हार्दिक आभार |
हटाएंरेणु जी कितना माधुर्य है इस कविता में . जो मन- मष्तिष्क में चहक ला देता है . दिल करता है बार बार पढूं . लाज़वाब
जवाब देंहटाएंसादर
प्रिय अपर्णा ---- आपके उत्साहवर्धन करते शब्द मेरी रचना को सार्थक बना रहे हैं | सस्नेह आभार आपका ---
हटाएंबहुत सुंदर आदरणिया अनुजा
जवाब देंहटाएंआदरणीय बड़े भ्राता ----- हार्दिक आभार आपका |
हटाएंरेणु जी , बहुत सार्थक रचना है । बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंआदरणीय सूबे सिंह जी ------ सबसे पहले मैं अपने ब्लॉग पर आपका स्वागत करती हूँ | आप ब्लॉग पर आये मेरी रचना पढ़ मेरा उत्साहवर्धन किया हार्दिक आभार आपका |
हटाएंबहुत प्यारी कोमल मृदुल रचना
जवाब देंहटाएंचिरैया सी नाजुक चुलबुली।
अफसोस ये प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है।
शुभ रात्री।
प्रिय कुसुम जी -- आपके सार्थक शब्द उत्साहवर्धन करते हैं | सस्नेह आभार |
हटाएंबहुत खूब
जवाब देंहटाएंबेहतरीन कविता
आदरणीय लोकेश जी-- सादर आभर आपका |
हटाएंअति सुंदर
जवाब देंहटाएंप्रिय शकू ---- सस्नेह आभार |
हटाएंवाह!खूबसूरत संवाद पेड और चिडिया के बीच ।
जवाब देंहटाएंसंपुर्ण जीवन दर्शन कराती बहुत ही सुंदर रचना, रेणु दी।
जवाब देंहटाएंवाह!
जवाब देंहटाएंजो फूल में गंध बन कर बसता,
करुणा से तार मन के कसता !
जो अनहद नाद-सा गुँजित हो
जड़ - प्रकृति में चेतन भरता !
वही साँसों में अमृत सा घुल
प्राणों में शक्ति भरता है !
अनिर्वाचनीय!!!!