मेरी प्रिय मित्र मंडली

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

सब गीत तुम्हारे हैं


 




तुम्हारी यादों की  मृदुल
 छाँव में  बैठ सँवारे  हैं 
मेरे पास कहाँ कुछ था
 सब गीत तुम्हारे हैं |


मनअम्बर पर टंका हुआ है,
ढाई  आखर  प्रेम  तुम्हारा।
थके  प्राणों का  संबल  जो,
पग - पग  पे  करता उजियारा।
हुए निहाल  निहार तुम्हें,
बिसरे दुःख सारे हैं!

सराबोर हैं आत्मरस से ,
ये जो छंद अनोखे हैं ।
तुमसे ही जीवनसार मिला,
शेष दावे सब थोथे है!
वही पल बस लगते अपने,
जो साथ गुजारे हैं!


तुम आए बदल गयी  दुनिया  
खुली पोटली सपनों की ,
सतरंगी आभा से सजे
बदली है भाषा नयनों की!
नये गगन में मनपाखी ने
 पंख पसारे हैं !

प्रीतनगर की इन गलियों से, 
अब तक तो अनजान थे हम।
अब कहीं जाकर मिला बसेरा,
कब किस दिल के मेहमान थे हम।
सालों मनचले सपनों ने ,  
ये  पथ खूब निहारे हैं!


तुम्हारी यादों की  मृदुल
 छाँव में  बैठ सँवारे  हैं 
मेरे पास कहाँ कुछ था
 सब गीत तुम्हारे हैं |

19 टिप्‍पणियां:

  1. अरसे बाद आपकी कविता पढ़ने को मिली रेणु जी। बहुत अच्छे भाव हैं इसके। अभिनन्दन आपका।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार और अभिनन्दन जितेन्द्र जी |

      हटाएं
  2. आहा कितना हृदयस्पर्शी गीत दी।
    सरस सुकोमल भाव पंक्ति के हर शब्द पोर से फूटता अनुराग मन सम्मोहित कर रहा है।

    हिय का स्पंदन बोल रहा
    तू रस साँसों में घोल रहा
    अनुभूति की मदिरा-सी बूँदों को
    छिड़क इत्र-सा झकझोर रहा
    जीवन के रेतील पथ पर
    तूने मखमली बाँह पसारे हैं।
    ----
    अति सुंदर गीत दी।
    बधाई स्वीकारें। थोड़ा जल्दी जल्दी लिखना दी।
    सस्नेह


    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. द्विगुणित सौंदर्य सम ।

      हटाएं
    2. प्रिय श्वेता, मूल रचना के भावों से कदमताल मिलाते तुम्हारे भाव रचना के अधूरे भावों को पूर्ण कर रहे हैं | हार्दिक आभार और शुभकामनाएं इस स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए |

      हटाएं
  3. उत्तर
    1. हार्दिक आभार और अभिनन्दन प्रिय अनुराधा जी |

      हटाएं
  4. बहुत बहुत सुन्दर मधुर गीत। हृदय से शुभ कामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय आलोक जी, हार्दिक स्वागत है आपका |

      हटाएं
  5. टेरती आँखों की जीवित ज्योति सम, प्रेमिल तेजोमय प्रभापुंज को नवरूपायित करता हुआ अति सुकोमल एवं सुकुमार उद्गार । इसकी मृदुल छांव अति सुखदाई है । आहा!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय अमृता जी, आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने रचना को सार्थक कर दिया |हार्दिक आभार और अभिनन्दन आपका |

      हटाएं
  6. आज आपको विदुषी आदरणीय रेणु जी लिखने का मन है, एक एक कर आपकी रचनाओं पढ़ती हूं,रससिक्त होती हूं,बहुत गूढ़ विषय पर सुंदर,सरस और पठनीय लेखन है आपका ।जन जन से जुड़ जाती हैं रचनाएँ ...
    ये रचना तो कोमल और निश्चल मन के सरस भाव हैं, जो आपने व्यक्त किए हैं,सच कवि मन ऐसा ही होना चाहिए । मैं अपनी एक कविता जो एक आम स्त्री मन को लेकर काफी पहले लिखी थी,आपको समर्पित कर रही हूं 🙏💐

    आज़ पहली बार आज़ाद हुई मैं

    उड़ रहे हैं पंख अब हवाओं में
    परिंदों का परवाज़ हुई मैं

    रोके कोई बेशक मुझे अब भी
    रुकेगी न उड़ान मेरी यारों
    साथ देंगे जमीं आसमाँ मेरा
    जोड़ करके सजा लूँगी मैं टूटे तारों

    देख लेना मुझे तुम आज़मा के
    अब न टूटेंगे ख़्वाब मेरे फिर
    कौन कहता है सज नहीं सकता
    हीरे मोती का ताज मेरे सिर

    बन भी जाए गर रहगुजर कोई
    तो आसमां भी थाम लेंगे हम
    मिला न साथ तो भी कोई बात नही
    राह कांटों में अपनी निकाल लेंगे हम

    यही वो बात है मुझमें जो
    सबसे जुदा करती है मुझको
    आसमां में भी एक सुराख
    बना के भी दिखा सकती है सबको

    कभी अनजान थी मैं अपने और तुम्हारे से
    अब परिचय की नहीं मोहताज मैं
    रख दिया है कदम मैंने पहली सीढ़ी पे
    देखना हो के रहूंगी अब से कामयाब मैं

    जिज्ञासा....🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १४ जनवरी २०२२ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  8. प्रीतनगर की इन गलियों से,
    अब तक तो अनजान थे हम।
    अब कहीं जाकर मिला बसेरा,
    कब किस दिल के मेहमान थे हम।
    सालों मनचले सपनों ने ,
    ये पथ खूब निहारे हैं!
    खूबसूरत एहसासों को बयां करती बहुत ही सुंदर रचना!
    प्रीत के एहसासों से खूबसूरत कोई एहसास नहीं! ये वो एहसास होते हैं जो इत्र इत्र सा पूरे रग में समा जाते हैं और प्रीत नगर की सभी गलियों को अपनी खुशबू से महका देते हैं!
    बहुत ही सुंदर😍💓

    जवाब देंहटाएं
  9. मेरे पास कहाँ कुछ था
    सब गीत तुम्हारे हैं |
    ऊंची सोच, गहन चिंतन
    कलम और कलमकार
    दोनों को शुभकामनाएं
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  10. दिल के कोमल और निश्चल भावों को प्रकट करती, दिल को छूती बहुत ही सुंदर रचना, रेणु दी।

    जवाब देंहटाएं
  11. प्रेम रस से परिपूर्ण हर पंक्ति , समर्पण के भाव को लिए हुए मानों स्वछंद आकाश में विचरण करते हुए मन के उद्गार शब्दों के मोतियों में बिखेर दिए ।

    तुम आए बदल गयी दुनिया
    खुली पोटली सपनों की ,
    सतरंगी आभा से सजे
    बदली है भाषा नयनों की!
    नये गगन में मनपाखी ने
    पंख पसारे हैं !
    बहुत सुंदर गीत ।
    वैसे कोई खास दिन था ?
    सस्नेह

    जवाब देंहटाएं
  12. गोपन नयनों का नयनों से
    सजी शर्वरी सपनों की।
    गीत भले तेरे साथी, पर!
    लय लगती कुछ अपनों-सी!
    बहुत सुंदर भाव!!! बधाई, आभार और शुभकामनाएँ!!!

    जवाब देंहटाएं
  13. तुम आए बदल गयी दुनिया
    खुली पोटली सपनों की ,
    सतरंगी आभा से सजे
    बदली है भाषा नयनों की!
    नये गगन में मनपाखी ने
    पंख पसारे हैं !
    अद्भुत आपको कोटि कोटि प्रणाम

    जवाब देंहटाएं

Yes

विशेष रचना

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा ----- कविता ---

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा   भला ! कैसे पहुँच पाऊँगी मैं ?  पर ''इक रोज मिलूंगी तुमसे  '' कह जी को बहलाऊंगी मैं ! मौन...