मेरी प्रिय मित्र मंडली

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

बिटिया ----


 घर  संभालती   बिटिया  
घर संवारती  बिटिया  ,
  स्वर्ग  को धरती पे 
   उतारती  बिटिया ! 

 सुघड़  है  सयानी  है  
बिटिया  तो  घर की रानी  है  ,
उम्र  भले  छोटी है पर 
बातों  में पूरी  नानी  है  ,
सफल  दुआ   जीवन  की 
ईश्वर  की  आरती बिटिया !! 

माँ  की   तो परछाई  है 
पर  गुणों  में सवाई  है ,
उजाला  घर  के  आँगन  का  
स्नेह की  शीतल पुरवाई  है ;
ममता  की   मूर्त  लगती 
जब  स्नेह  से  दुलारती बिटिया !!

तन  से सबल  बहुत  
मन  से  है  सरल  बहुत ,
करुणा से भरी   है  
है भावों से निर्मल  बहुत  ,
 इरादों  की  धनी  है  
करती , जो मन  में  धारती  बिटिया !!

घर -भर  की  दुलारी  है  
सखियों  की  बड़ी  प्यारी  है ,
पिता  का  गर्व    बहुत    ऊंचा
भाई  की   परम हितकारी  है  ;
 अधूरी ममता  पूरी  करती 
 जब  '' माँ ''कह  पुकारती  बिटिया !!

चित्र ---- गूगल से साभार --
------------------------------------------------------------






48 टिप्‍पणियां:

  1. बिटिया को समर्पित रचना सरलता का संवाद करती है. हर बिटिया के मनोभावों को अभिव्यक्ति मिली है. सुन्दर रचना. बिटिया के प्रति प्यार-दुलार बढ़ाती रचना.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय रवीन्द्र जी आप के उत्साहवर्धन करते शब्द हमेशा आंतरिक ऊर्जा से भर देते है -- बहुत आभार आपका |

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 24 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 24 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  4. सरल ,सहज और सुंदर अभिव्यक्ति रेणु जी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय श्वेता जी सस्नेह आभार आपका --

      हटाएं
  5. बहुत ही सुंदर....
    अधूरी ममता पूरी करती
    जब माँ कह पुकारती बिटिया....
    लाजवाब....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय सुधा जी आभारी हूँ आपकी -- रचना का मर्म समझने के लिए

      हटाएं
  6. बहुत सुंदर सीधी सरल सुगम रचना
    और हमारी प्यारी बिटिया

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आत्द्नीय ऋतू जी आभारी हूँ आपकी और सादर सस्नेह स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग पर ___________

      हटाएं
  7. बिटिय घर की चहल पहल
    माँ बाप की लाडली हर पल
    शक्ति जैसे दुर्गा आंबे
    निर्मल जैसे शीतल जल ...

    बहुत सुब्दर रचना है आपकी ... कुछ शब्द मन से स्वतः ही निकल आये सो लिख दिए ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय दिगंबर जी आपकी इन पंक्तियों ने सरल सी रचना को चार चाँद लगते हुए मेरे अव्यक्त भावों को पूर्णता दी है -- बहुत आभारी हूँ आपकी --

      हटाएं
  8. बिटिया की कमी जिसे महसूस होती है वही जान सकता है कि बिटिया क्या होती है ! बड़ी सुंदर रचना है रेणुजी आपकी ! शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मीना जी खुश हूँ कि आपने रचना पढ़ी और इसमें बिटिया की माँ होने के गर्व को महसूस किया |
      भाग्यशाली हूँ कि ईश्वर का ये उपहार मुझे भी मिला है -- बहुत आभारी हूँ आपकी कि आप मेरे ब्लॉग पर पधारी |

      हटाएं
  9. उत्तर
    1. आदरणीय आभारी हूँ आपकी जो आप मेरे ब्लॉग पर पधारे -----

      हटाएं
  10. सदस्यतानहीं मिल रही... This blod doesnt have e mail subscrptions enabled ka message aa raha hai.

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर रूप में प्रस्तुत किया है आपने बिटिया का रूप

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय शकुन्तला-- हर माँ के लिए बिटिया गर्व का विषय होती है | सस्नेह आभार आपका

      हटाएं
  12. बहुत सुंदर रचना सुंदर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय नीतू जी -- सस्नेह आभार् आपका !!!!!!

      हटाएं
    2. प्रिय नीतू जी --- सस्नेह आभार आपका |

      हटाएं
  13. बिटिया घर की रानी है और माल्किन् भी है ...
    घर की जान होती ही ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी आदरणीय दिगम्बर जी -- आपने बिलकुल सही कहा | हर्दिक आभार आपका सार्थक शब्दों के लिए |

      हटाएं
  14. उत्तर
    1. आदरणीय विश्वमोहन जी-- सादर आभार आपका |

      हटाएं
  15. चन्दा हैं बेटियाँ सूरज हैं बेटियाँ ।
    तपती दोपहरी में छइयाँ हैं बेटियाँ ॥
    बेटियाँ को प्यार दें आज फिर से मान दें ।
    सृष्टिधारिणी को उनकी फिर से पहचान दें ॥
    गर्भ का न पात हो, काल सुप्रभात हो ।
    धरती की शक्ति को फिर से सम्मान दें ॥

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय कौशलेंद्रम जी -------सबसे पहले हार्दिक स्वागत करती हूँ आपका कि आपने मेरे ब्लॉग पर पधार कर मेरा सम्मान बढाया | मेरी रचना के अधूरे भावों को पूरा करती आपकी काव्यात्मक टिप्पणी मेरी
      मूल रचना से कहीं बेहतर और सराहनीय है | आपकी हार्दिक आभार्री हूँ जो आपने मेरे ब्लॉग पर आकार मेरी रचनाएँ पढ़ी | मेरी दूसरी रचना पर भी आपकी टिप्पणी आई पर ना जाने क्यों वह ब्लॉग पर दिखाई नहीं दी केवल मेल तक सीमित रह गई| निवेदन है कि स्नेह बनाये रखे |

      हटाएं
  16. घर संभालती बिटिया -
    घर संवारती बिटिया ,
    स्वर्ग को धरती पे
    उतारती बिटिया ! . ..बहुत ही सुन्दर सृजन सखी 👌
    इन शब्दों में आप ने नारी का सपूर्ण जीवन चित्रण अंकित किया है बेटी के बहाने से नारी की बेजोड़ छवी. ....रेणु जी मेरे पति आर्मी के एक अच्छे ओदे पर है मैं आर्मी स्कूल में कंप्यूटर टीचर थी पर वो सुकून नहीं मिला जो आज एक कुसल गृहणी के रुप में मिला , नारी का गृहणी होना अपने आप में सफलता सफलता के चार चाँद लगाने जैसा है मेरे नजरिए से .....
    बहुत ही सुन्दर रचना. .कभी कभी आप की रचनाएँ पढ़ने को मिलती है आभार सखी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय अनिता - आपके शब्दों ने नारी विमर्श को नये अर्थ दिए हैं | सचमुच घर गृहस्थी से ही नारीत्व की शोभा है या कहूं नारीत्व घर गृहस्थी का श्रृंगार है |जानकार बहुत अच्छा लगा की आप एक वीर जवान की जीवनसंगिनी हैं | इसके लिए मेरी विशेष बधाई और प्यार |आज बेटियां पढ़ लिख कर घरेलू कामकाज से दूर हो रही हैं | पर मेरी बिटिया घर के पढाई के साथ साथ घर के कामों को बहुत अच्छी तरह कर लेती है | नारी की सम्पूर्णता इसी में निहित हैकि वह घर गृहस्थी को दरकिनार ना करे क्योकि यही संस्कार उसका गहना हैं | ये मेरी पुरानी रचना है आजकल नया लिखने में खुद को असमर्थ पाती हूँ |इसी लिए पुँरानी रचनाएँ शेयर करती हूँ |आपके सुंदर दृष्टिकोण से पुर्णतः सहमत हूँ | सस्नेह आभार बहन|

      हटाएं
    2. रेणु जी,

      अनिता सैनी के संदेश पर आपका जवाब पढ़ा. बड़ा दुख हुआ कि आपने लिखा -
      "आजकल नया लिखने में खुद को असमर्थ पाती हूँको असमर्थ पाती हूँ."

      क्या बात है?"

      किस बात का तनाव लेकर फिर रही हैं. लिखिए. तनाव लिखने से घटेगा. हाँ व्यक्तिगत हो तो पोस्ट मत कीजिए पर लिखिए.

      लिखकर आप अपना तनाव दूर कर सकती हैं.

      सादर,
      अयंगर.

      हटाएं
    3. आदरणीय अयंगर जी -- ऐसा कोई तनाव नहीं बस कुछ नया लिख नहीं पा रही | हाँ पढने के लिए जरुर हर रात बैठती जरूर हूँ | कई ड्राफ्ट तैयार पड़े हैं रचनाओं के वे जल्द ही शेयर करूंगी |अच्छा लगा आभासी जगत में आप जैसा शुभचिंतक पाकर | आपने इतनी चिंता व्यक्त की जो मुझे अभिभूत कर गई |सादर प्रणाम |

      हटाएं
  17. आदरणीया दीदी जी बिटिया पर आपकी यह रचना बिटिया जैसी ही प्यारी लगी......लगा जैसे माँ अपनी ममता से सँवार कर अपनी बिटिया का परिचय दे रही है। कविता में जो आपके भाव हैं वो मुझे मेरी माँ की झलक दिखा रहे हैं।
    शायद हर माँ एसी ही होती है....जब बच्चों के विषय में कुछ कहना हो तो शब्द कम पड़ जाते हैं भाव नही
    बहुत सुंदर रचना आपकी दिल को छू गयी
    सादर नमन सुप्रभात

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय आंचल -- ये रचना मेरी तुम्हारे जैसी बिटिया के लिए ही लिखी गयी थी जो कि उन्नीस साल की है और बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा है साथ में एयर विंग NCC भी ज्वाइन किया है |हर माँ को अपनी बिटिया के गुणों पर गर्व होता है |आपके स्नेहिल शब्द अभिभूत कर गये | सस्नेह आभार और मेरा हार्दिक स्नेह आपके लिए |

      हटाएं
    2. आपकी प्यारी सी गुड़िया को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएँ और प्यार

      हटाएं
    3. ढेरों आभार ओर प्यार मेरा इस गुडिया को भी |

      हटाएं
  18. अधूरी ममता पूरी करती --
    जब '' माँ '' कह पुकारती बिटिया
    बहुत प्यारी ..रचना सखी,बेटियां हमारी ही तो परछाई होती है ,बहुत खूब... ,बहुत दिनों बाद नज़र आई हो तुम, अच्छा लगा , स्नेह सखी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सस्नेह आभार प्रिय कामिनी --तुम्हारी स्नेहिल प्रतिक्रिया बहुत ख़ुशी देती है | आजकल स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कते चल रही हैं सो थोड़ा बहुत आती हूँ ब्लॉग पर | मेरा प्यार तुम्हारे लिए |

      हटाएं
  19. सुघड़ है सयानी है
    बिटिया तो घर की रानी है ;
    उम्र भले छोटी है
    बातों में पूरी नानी है ;
    सफल दुआ जीवन की
    ईश्वर की आरती बिटिया !!
    सही कहा सखी बेटी पाकर जीवन सफल हो गया बहुत दया आती है उन पर जिनकी बेटी नहीं....।
    नानी बनकर सयानी बातों से चुप करवा कर माँ सी डाँटकर ख्याल रखती हैं।
    घर की साज-सज्जा और परिवार के हर किसी की पसन्द नापसंद जैसे बेटी करते है वैसे बेटे कभी सोचते भी नहीं....बहुत ही लाजवाब भावपूर्ण सृजन हेतु बहुत बहुत बधाई आपको।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय सुधा जी, विलंबित प्रतिउत्तर के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया मेरी रचना को सार्थकता प्रदान करती है। इतने भावपूर्ण शब्दों के लिए आभार शब्द बहुत छोटा है। बस मेरा प्यार और शुभकामनाएं आपके लिए🌹🌹 🙏❤❤

      हटाएं
  20. माँ की तो परछाई है -
    पर गुणों में सवाई है ,
    उजाला घर के आँगन का
    स्नेह की शीतल पुरवाई है ;

    अद्धभुत भावाभिव्यक्ति
    सत्य का दर्शन करवाती रचना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय दीदी, मेरे ब्लॉग पर आकर रचना को सार्थकता प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार। सादर प्रणाम और शुभकामनाएं🙏🙏 🌹🌹❤❤

      हटाएं
  21. बेटी के मनोभावों को व्यक्त करती सुंदर रचना, रेणु दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपके स्नेह की सदैव आभारी हूँ प्रिय ज्योति जी। आपकी उपस्थिति सदैव उत्साह बढाती है 🌹🌹🙏❤❤

      हटाएं

Yes

विशेष रचना

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा ----- कविता ---

चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा   भला ! कैसे पहुँच पाऊँगी मैं ?  पर ''इक रोज मिलूंगी तुमसे  '' कह जी को बहलाऊंगी मैं ! मौन...