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शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

मन प्रश्न कर रहे -------कविता --


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हुआ शुरू  दो प्राणों का   -- मौन -संवाद-  सत्र  !
मन प्रश्न  कर  रहे - स्वयम ही दे रहे उत्तर  !!

हैं दूर बहुत  पर दूरी का  एहसास  कहाँ है ?

कोई और एक दूजे के इतना  पास कहाँ है ?
 न कोई पाया जान  सृष्टि का  राज    ये गहरा-
राग- प्रीत गूंज रहा  चतुर्दिश  रह- रह कर !!

समझ रहे एक दूजे के मन की भाषा -

 जग पड़ी  भीतर सोयी  अनंत अभिलाषा -
 सुध - बुध बिसरी - बुन रहे  नये सपन सुहाने  
विदा हुई हर  पीड़ा--  जीवन से हंसकर !!

नयी सोच ,  उमंग नयी .शुरू हुई नई कहानी

आज कहाँ चल पाई  - जग की मनमानी  ;
 दोहरा रहे  हैं  फिर से --वही वचन पुराने -
जागी है भोर सुहानी -सो गयी रात थककर !!


अनगिन भाव अनायास प्राणों से पिघले -

  सजे अधर  पे हास -कभी  नम हो गयीं पलकें -
दो तनिक तो साथ -थमो !ऐ समय की लहरों !
आई ख़ुशी अनंत -दुःख तुम चलो सिमटकर!!

स्वरचित -- रेणु

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20 टिप्‍पणियां:

  1. उत्कृष्ट रचना
    बहुत खूब लिखा आप ने...लाजवाब

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    1. प्रिय नीतू जी -- सस्नेह आभार उत्साहवर्धन के लिए |

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  2. हुआ शुरू दो प्राणों का -- मौन -संवाद- सत्र !
    मन प्रश्न कर रहे - स्वयम ही दे रहे उत्तर !!
    बेसतरीन रचना।
    दूर से आता वो मौन स्वर,
    करुण क्रंदन करता वो स्वर,
    वेदना से पिघलते वो ज्वर,
    समाहित होते हैं हृदय में टकराकर....

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    उत्तर
    1. आदरणीय पुरुषोत्तम जी -- आपकी काव्यात्मक टिप्पणी ने रचना को विस्तार तो दिया ही -- साथ में इसकी शोभा को कई गुना बढ़ा फिया है | आपके शब्द आभार से प्रे हैं | बस सादर नमन |

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  3. स्वयं का स्वयं से संवाद ही प्रश्न के सही उत्तर की और ले जाता है ...
    दिल जहाँ भाव विहोर होता है ... सुंदर रचना ...

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    उत्तर
    1. आदरणीय दिगंबर जी -- ब्लॉग पर आपका विचरण और उत्साहवर्धक शब्दों से भरा सार्थक चिंतन मन को आह्लादित कर गया | क्या लिखूं ? आप जैसे कलम के धनी विद्वान के अनमोल शब्दों से गदगद हूँ | सादर आभार और नमन आपको |

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  4. हैं दूर बहुत पर दूरी का एहसास कहाँ है ?
    कोई और एक दूजे के इतना पास कहाँ है ?
    सुंदर स्वप्न,जो जल्दी ही टूट जाते हैं और एक मृगमरीचिका में उलझाकर छोड़ देते हैं ! जब तक ये भ्रम टूटता है तब तक आप खुद को खो चुके होते हैं !
    बेहतरीन शब्द शिल्प के लिए बधाई,बहुत सुंदर कल्पना !

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    1. प्रिय मीना बहन -- रचना पर आपके भावनात्मक चिंतन ने रचना के अंतर्निहित भाव की सार्थक विवेचना की है | आपके शब्द आभार से कहीं परे और भावुक कर देने वाले हैं | बस मेरा प्यार ------

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  5. आपकी लिखी रचना आज के "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 26 फरवरी 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आदरणीय यशोदा दी -- आपके सहयोग के लिए आभारी हूँ आपकी |

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  6. हैं दूर बहुत पर दूरी का एहसास कहाँ है ?
    कोई और एक दूजे के इतना पास कहाँ है ?
    वाह!!!!
    बहुत ही सुन्दर ....लाजवाब.....

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    उत्तर
    1. आदरणीय सुधा जी-- आपके शब्द प्रेरक हैं |

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  7. वाह बहना बहत ही सुंदर
    अलब्ध सा एकाकार होता मन का अविचल भाव ।
    अपअप्र अद्भुत

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    1. आदरणीय कुसुम बहन -- आपके शब्दों से मन आह्लादित है | सस्नेह आभार |

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  8. बहुत ही सुंदर पंक्तियां रेणु जी

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  9. प्रिय दीपाली जी -- सस्नेह आभार आपका |

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