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बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

एक दीप तुम्हारे नाम का ------- नवगीत

Image result for दीपक का चित्र

अनगिन   दीपों संग आज जलाऊँ  
 एक दीप  तुम्हारे  नाम का  साथी ,
तुम्हारी प्रीत से हुई  है जगमग 
क्या कहना इस शाम  का साथी !!

  जब से   तुम्हें   साथी पाया है  

 आह्लादित मन   बौराया है ,
तुमसे   कहाँ  अब अलग रही मैं ?
खुद को  खो  तुमको पाया है ;
 भीतर तुम हो  ,बाहर  तुम हो -
 तू  गोविन्द - मेरे मन धाम का साथी !!

ये  अनुराग  तुम्हारा   साथी - 

जाने कौन गगन ले जाये ? 
पुलकित हो   बावरा  मन मेरा  
आनंद शिखर  छू जाये ;
तुम बिन अधूरा  परिचय मेरा  
तू प्रतीक  मेरे स्वाभिमान का साथी !!

मनबैरागी  बन   तजूं  रंग सारे 

मन रंगूँ तेरी प्रीत के रंग में ,
साजन  रहे अक्षुण साथ  तुम्हारा  
जीवनपथ पे चलूँ   संग - संग मे ;
 बिन   तेरे  ये जीवंन मेरा  
  है मेरे  किस काम  का साथी ? 

 अनगिन   दीपों संग आज जलाऊँ 

 एक दीप   तुम्हारे नाम का  साथी ,
तुम्हारी प्रीत से हुई  है जगमग - 
क्या कहना इस शाम  का साथी !! 

स्वरचित -- रेणु
चित्र -- साभार गूगल -- 
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Gप्लस से साभार टिप्पणी --


Mahatam Mishra's profile photo
क्या कहना इस शाम का साथी, बिन तेरे ये जीवंन मेरा -अब है मेरे किस काम का साथी ? वाह वाह आदरणीया, मन मुग्ध करती रचना, स्वागतम
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53 टिप्‍पणियां:

  1. वाह रेणु जी,
    अपने जीवन साथी संग अमिट और अमित प्रेम को दीपावली केसंकेतों से कितनी सुंदरता से प्रस्तुत किया है. आप लोगों का जनज जनम का साथ रहे.

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    उत्तर
    1. आदरणीय अयंगर जी दीपावली के पावन अवसर पर आपकी स्नेहाशीष अनमोल है | आपकी निर्मल भावनाएं आभार से परे है --पढ़कर बस अभिभूत हूँ !!!!!!!!!!!!!! प्रतिउत्तर में देरी के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ |

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  2. बहुत सुंदर ! प्रगाढ़ प्रीति के भावों की अभिव्यक्ति !बेहतरीन शब्द संयोजन !

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  3. बहुत ही खूबसूरत भावपूर्ण रचना हैं दी

    जवाब देंहटाएं
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    1. प्रिय शकुन्तला ------ मेरे ब्लॉग पर आपके स्वछंद विचरण से अभिभूत हूँ | आपके स्नेह भरे शब्दों और निर्मल भावनाओं का कोई उत्तर नहीं है मेरे पास | बस ये स्नेह का रिश्ता यूह ही बना कर रखना |

      हटाएं
  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार २३ अक्टूबर २०१७ को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

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    1. प्रिय ध्रुव आपकी आभारी हूँ | साहित्य समाज से परिचय में आपका सहयोग अतुलनीय है |

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  5. समर्पण का मनोहर राग सुनाता ,प्यार का दीपक जलाता मोहक नवगीत रचा है आपने आदरणीया रेणु जी।
    दीपावली के उल्लास में नए रंग भरता यह नवगीत बहुत अच्छा लगा।
    बधाई एवं शुभकामनाऐं।

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    1. आदरणीय रविन्द्र जी आपके प्रेरक शब्द अभूतपूर्व उत्साहवर्धन करते हैं | आभारी हूँ आपकी |

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  6. प्रेम और समर्पण में पगे हुए भाव लाज़वाब रचना आदरणीय रेनू दी. सादर

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  7. सुंदर अति मनमोहक प्रीत के दीप जलाता एक गीत,आशा और समर्पण से लबालब भरा तेल सुनहरे स्वप्न की बाती से प्रज्जवलित चहुँओर प्रकाशित कर उजास भरता हुआ।
    बहुत सुंदर लिखा आपने रेणु जी।
    वाह्ह्ह...👌

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    1. श्वेता बहन आपके शब्द अनमोल हैं -- आभारी हूँ आपकी |

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  8. वाह!!रेणु जी ,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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    1. आदरणीय शुभा जी -- आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर और आभारी हूँ कि आपने रचना पढ़ी |

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  9. प्रेम भाव हिलोरें लेता मन और एक दीप तुम्हारे साथ .. तुम्हारे नाम ... जलाने की कामना ... बहुत ही मधुर प्रेम अभिव्यक्ति ...

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    1. आदरणीय दिगम्बर जी -- रचना को विस्तार देते आपके शब्द अनमोल हैं | हार्दिक आभार आपका |

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  10. अच्छी रचना! आप दोनों को मेरी शुभकामनाएँ! आपकी रचनाओं में सादगी और मन को शीतलता देने वाले भाव मिलते हैं। (वैसे एक और समर्पित, अच्छे प्रेमी युगल को देखकर थोड़ी जलन भी है हा हा....चिंता मत कीजिए नज़र नहीं लगेगी)

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    1. प्रिय मोहित -- आपके स्नेह भरे शब्दों में गजब का प्रोत्साहन है | बहुत आभारी हूँ आपकी | और सहृदय और निर्मल मन की नजर नहीं लगती - सिर्फ दुआएं लगती हैं मेरे भाई | आपको भी सस्नेह शुभकामना |

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  11. वाह!!प्रिय सखी रेनू ,बहुत ही भावपूर्ण ,प्रेम रस में पगी रचना । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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    1. प्रिय शुभा बहन -- आपके स्नेह और शुभकामनाओं के लिए सस्नेह आभार | आपको भी मेरी हार्दिक शुभकामनायें |

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  12. बहुत सुंदर रचना रेनू जी आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. प्रिय अनुराधा बहन - आपको भी सस्नेह शुभकामनायें |

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    1. प्रिय अनिता जी -- सस्नेह आभार और शुभकामनायें |

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  14. सराहना से परे!!
    दिल के साज पर जैसे आवाज़ मचल रही है ,सुंदर स्नेह समर्पित रचना रेनू बहन ।
    बहुत ही प्यारी रचना प्रेम का उच्च स्वरूप, समर्पण बस समर्पण।
    सरस सार्थक रचना ।

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    1. प्रिय कुसुम बहन आपके शब्द अनमोल हैं | सस्नेह आभार |

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  15. प्यार से ओतप्रोत बहुत ही सुंदर रचना रेणु दी।

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  16. लाजबाब।।।।।।।।।।।।। ,सखी

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  17. जीवनसाथी के प्रति प्रेम- समर्पण की भावनाओं मेंं पगी बहुत ही सुंदर रचना रेणु दी आपकी लेखनी को नमन।

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  18. ... जीवन साथी के प्यार को समर्पित करती हुई एक बेहद खूबसूरत रचना... हर पंक्तियों में प्यार और समर्पण झलक रहा है दीपावली की आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं ...,

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    1. प्रिय अनु हार्दिक आभार और शुक्रिया |

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  19. अनगिन दीपों संग आज जलाऊँ
    एक दीप तुम्हारे नाम का साथी ,
    तुम्हारी प्रीत से हुई है जगमग -
    क्या कहना इस शाम का साथी

    क्या कहना !!! तुम्हरी लेखनी का सखी ,साथी के नाम का दीपक तो सदैव अंतरात्मा में जलता ही रहता हैं,
    तुम्हे और तम्हारे समस्त परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं सखी

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    उत्तर
    1. प्रिय कामिनी तुम्हें भी हार्दिक शुभकामनायें सखी |

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  20. जब से तुम्हे साथी पाया है -
    आह्लादित मन बौराया है ,
    तुमसे कहाँ अब अलग रही मैं ?
    खुद को खो तुमको पाया है ;
    भीतर तुम हो -बाहर तुम हो -
    तू गोविन्द - मेरे मन धाम का साथी !!
    वाह रेणु जी !कमाल की भावाभिव्यक्ति.....
    प्रीत का ये दीप जो आपकी लेखनी से जगमग हुआ है इसकी सराहना के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास बहुत ही लाजवाब सृजन...
    वाह!!!
    आपको और आपके समस्त परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. प्रिय सुधा बहन, रचना पर स्नेहिल उद्गारों के लिए हार्दिक आभार और शुक्रिया |

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  21. बहुत भावपूर्ण रचना ...सुंदर

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    1. प्रिय नीतू , हार्दिक आभार और शुक्रिया |

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  22. सच्चे अनुराग का तेल, सच्चे समर्पण की बाती, और प्रेम की निर्मल ज्योति, ये तीनों अमर दीप के लिए आवश्यक हैं.

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    उत्तर
    1. आपका हार्दिक आभार और शुक्रिया आदरणीय गोपेश जी |

      हटाएं

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