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शुक्रवार, 18 मार्च 2022

किसने रंग दीना डाल सखी ?

 


पीला, हरा,गुलाबी, लाल सखी!
किसने रंग दीना डाल सखी  ? 

मोहक चितवन, चंचल नयना, 
अधरों पर रुके -रुके बयना!
ये जादू ना किसी अबीर में था
सब प्रेम ने किया कमाल सखी! 

क्यों इतनी मुग्ध हुई गोरी? 
कर सकी ना जो जोराजोरी, 
यूँ बही प्रीत गंगधार नवल
सुध- बुध खो हुई निहाल सखी!


कलान्त  हृदय हुआ शान्त,
महक उठा प्रेमिल एकान्त !
दो प्राण हो बहे एकाकार
बिसरे  जग के जंजाल सखी!


चित्र-गूगल से साभार 

16 टिप्‍पणियां:

  1. होली पर दो नशे सिर चढ़कर बोलते हैं -
    भाँग का और प्रेम का।
    बाकी सब फालतूगिरी तो बहुत होती है पर वह होली नहीं।
    मोहक चितवन, चंचल नयना,
    अधरों पर रुके -रुके बयना!
    ये जादू ना किसी अबीर में था
    सब प्रेम ने किया कमाल सखी!
    वैसे मुझे तो इन रंगों से बहुत डर लगता है शुरू से ही, पता नहीं क्यों !!!

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    1. प्रिय मीना,बहुत-बहुत आभार इस भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए।असल ये कुछ पंक्तियाँ,ब्लॉग जगत की शीर्ष रचनाकार और हमारी अत्यंत स्नेही मित्र इंदिरा गुप्ताजी के लिए पिछ्ले साल होली पर लिखी थी। उन्होने अपनी रंगों से पुती बहुत प्यारी तस्वीर मुझे व्हात्ट्स अप्प पर भेजी,तो मैने उन्हें ये पंक्तियाँ लिख भेजी।और इस दिन प्रेम भी रंगों से सजकर ही पूर्णता पाता है।आपको ढेरों शुभकामनाएं और प्यार ❤❤

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  2. मोहक चितवन, चंचल नयना,
    अधरों पर रुके -रुके बयना!
    ये जादू ना किसी अबीर में था
    सब प्रेम ने किया कमाल सखी!
    बहुत सुंदर सृजन, रेणु दी।

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    1. हार्दिक आभार प्रिय ज्योति जी।आपकी उपस्थिति बहुत उत्साहवर्धक है🙏❤

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  3. इस प्रीत की गंगधार में बहना ही तो वो कमाल है जो जादू सा मोह लेता है। जिस छलिया का यह रंग होता है उस पर तो कोई दूसरा रंग चढ़ता भी नहीं है।बस दिग्दिगंत तक महकता रहता है वही प्रेमिल एकांत.....

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    1. आपकी प्रेमिल और उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ प्रिय अमृता जी🙏❤

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  4. आपने सही कहा प्रिय कविता जी।हार्दिक आभार और अभिनंदन आपका🙏❤

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  5. रंगोत्सव पर्व और प्रेमिल भावों से सजी बहुत सुन्दर रचना ।

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    1. स्नेहिल उपस्थिति के लिये आपका हार्दिक आभार प्रिय मीना जी 🙏❤

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  6. परिवारिक व्यसताओं के कारण बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर आना हुआ प्रेमिल भावों से सजी बहुत सुन्दर रचना रेणु दी 🙏

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    1. कोई बात नहीं प्रिय संजय।अच्छा लगा ब्लॉग पर तुम्हारा इतने दिनों के बाद आना।हार्दिक आभार ।

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  7. ये जादू ना किसी अबीर में था
    सब प्रेम ने किया कमाल सखी!
    सही कहा प्रेम का ही कमाल होता है होली पर अबीर का कहाँ...
    बहुत ही लाजवाब सृजन
    वाह!!!

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    1. हार्दिक आभार और शुभकामनाएं प्रिय सुधाजी ❤🌺🌺❤

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  8. प्रेमिल भावों से सजी बहुत सुन्दर रचना बहुत दिन बाद आपके ब्लॉग पर आया ..बहुत अच्छा लगा

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    1. हार्दिक आभार और अभिनंदन प्रिय संजय।समय निकालकर मेरे ब्लॉग पर आये,अच्छा लगा 🌺🌺🙏

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